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नर्सरी का दर्द

मैं नर्सरी की भूमि हूँ.मेरी कोख मेंअनेक बीज बोए गए अनेक बारकिंतु ज्यों ही पनपे थे वे थोड़ा कि उखाड़ कर बो दिया गयाउन्हे अन्यत्र कहींमेरी गोद सदा सूनी जबकि मैं बाँझ नहीं.
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मौसम पे जब भी छलक के गिरता है प्यार !

मै तुम्हें कितना कम प्यार देता हूँऔर उतने से हीं तुम कितना ज्यादा भर जाती होऐसा नहीं है कितुम्हारी धारिता कम हैया इच्छापर जितना ख्वाब के भीतर रहकरदिया जा सकता है प्यारउतना मुश्किल होता है देनाख्वाब के बाहर रहते हुए, मेरे लिए और शायद किसी के लिए भी,तुम
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