कविता की तरह दिमाग़ में उपजते हैं विज्ञापन के शीर्षक
इश्तेहारनामा में आपका स्वागत है. इस नये ब्लॉग पर यह मेरी पहली पोस्ट है. पच्चीस बरस से ज़्यादा वक़्त हो गया एडरटाइज़िंग की दुनिया में काम करते हुए.इस बात की ख़ास तसल्ली है कि अंग्रेज़ी प्रभाव वाले इस व्यवसाय में हिन्दी में काम करते हुए अपनी पहचान बना पाया और
Jan 31 2010 11:07 AM



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