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मानव श्रंखला

उम्मीद कर रहा था कि बंगलौर में भी लोग इकठ्ठे होंगे और मोमबत्तियां जलाएंगे। ऐसा हुआ मगर बहुत ही छोटे स्तर पर और लोगों को इसके बारे में पता नहीं लगा। मुझे भी अखबार से ही पता लगा और अब प्रशासन ने यहां पर किसी भी रैली या गैदरिंग पर सुरक्षा को या खतरे को
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बल बल जाऊँ मैं तोरे रंगरेजवा

एक पोस्ट में मैनें कहा था कि कुछ रचनाओं में अमरत्व के गुण होते हैं। ग़लत नहीं कहा था। इस बार " छाप तिलक सब छीनी " कैलाश खेर की आवाज़ में सुना और फिर से प्रभावित हुआ। कैलाश की आवाज़ भी उतनी ही दिलकश है जितना ख़ुसरो का लिखा दिलफ़रेब है। (बीच में कबीर भी शाम