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प्रलय का इंतजार

आज की यह पोस्ट माँ पर, पर वो माँ जो हर किसी की है। जो सभी को बहुत कुछ देती है, पर कभी कुछ माँगती नहीं. पर हम इसी का नाजायज फायदा उठाते हैं और उसका ही शोषण करने लगते हैं. जी हाँ, यह हमारी धरती माँ है. हमें हर किसी के बारे में सोचने की फुर्सत है, पर धरती
 
KK Yadava
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एक डाकिया यहाँ भी

कानपुर में साहित्यकारों-बुद्धिजीवियों द्वारा 17 जनवरी, 2010 (रविवार) को आयोजित विदाई-समारोह के दौरान दैनिक जागरण अख़बार के "भाई साहब" स्तम्भ में कार्टून बनाने वाले अंकुश जी ने "डाकिया डाक लाया" ब्लाग के सूत्रधार कृष्ण कुमार यादव जी का डाकिया पर एक
 
डाकिया बाबू