मधुकरी
स्मृतियों में,अपने बचपन से बहुत पीछे…अपनी माँ के बचपन सेयाद आते हैं मुझे कभी- कभी कूड़ी वाले बाबादेखना तो असंभव रहा उन्हेंमगर सुन सुन करजैसे कोई गीत याद हो जाता है, छप जाता है मानस परवैसे ही जाने अनजाने उनका अनदेखा व्यक्तित्व अंकित रहाकहीं अंतस में
Apr 23 2010 09:42 AM



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