पसंद करें
4
नापसंद करें

क्या देखते हैं वो फिल्में...

मंगलवार को एक काम से चंडीगढ़ जाना हुआ, बठिंडा से चंडीगढ़ तक का सफर बेहद सुखद रहा, क्योंकि बठिंडा से चंडीगढ़ तक एसी कोच बसों की शुरूआत जो हो चुकी है, बसें भी ऐसी जो रेलवे विभाग के चेयर कार अपार्टमेंट को मात देती हैं। इन बसों में सुखद सीटों के अलावा फिल्म
पसंद करें
3
नापसंद करें

किसान एवं टुकड़े दो रचनाएं

किसानफटे पुरानेमटमैले से कपड़ेटूटे जूतेमटमैले से जख्मी पैरकंधे पर रखा परनाढही सी पगड़ीअकेले ही खुद से बातेंकरता जा रहा हैशायदमेरे देश का कोई किसान होगा।परना- डेढ़ मीटर लम्बा कपड़ाटुकड़ेबचपन मेंजब एक रोटी थी,तो माँ ने दो टुकड़े कर दिए,एक मेरा, और एक भाई कालेकिन
पसंद करें
2
नापसंद करें

कितने और हैं पैसे और शहीदी ताज?

कुलवंत हैप्पी कितने शहीदी ताज और मुआवजा देने के लिए पैसे हैं, शायद सरकार के लेखाकार और नीतिकार सोच रहे होंगे? साथ में यह भी सोच रहे होंगे कि बड़ी मुश्किल से हवाई हादसे की ख़बर के कारण जनता का ध्यान बस्तर से हटा था, नक्सलवाद से हटा था। चलो अफजल गुरू को
पसंद करें
3
नापसंद करें

बुजुर्ग की खुशी का रहस्य

मैं कभी नहीं भूल सकता, एक बड़ा सा घर, और वो बुजुर्ग, जो सुबह सुबह मुझे गैलरी में खड़ा मिलता है। मैं उसको देखता हूँ, वो मुझे देखता है। हल्की सी मुस्कान का आदान प्रदान होता है दोनों में, और फिर मैं आगे बढ़ जाता हूँ, बिना कुछ बोले। इस तरह की वार्तालाप कई दिनों
पसंद करें
9
नापसंद करें

हैप्पी अभिनंदन में दीपक "मशाल"

हैप्पी अभिनंदन में आज आप जिस ब्लॉगर हस्ती से मिलने जा रहे हैं, वो शख्सियत अपनी माटी से शारीरिक तौर पर तो दूर है, लेकिन रूह से जुड़ी हुई है। यही जुड़ाव तो है, जो कोंच छोड़ने और बेलफास्ट, उत्तरी आयरलैंड पहुंचने के बाद भी हिन्दी ब्लॉग जगत के दीपक "दीपक मशाल'
पसंद करें
5
नापसंद करें

दिलों में नहीं आई दरारें

लेखक : कुलवंत हैप्पी पिछले कई दिनों से मेरी निगाह में पाकिस्तान से जुड़ी कुछ खबरें आ रही हैं, वैसे भी मुझे अपने पड़ोसी मुल्कों की खबरों से विशेष लगाव है, केवल बम्ब धमाके वाली ख़बरों को छोड़कर। सच कहूँ तो मुझे पड़ोसी देशों से आने वाली खुशखबरें बेहद प्रभावित
पसंद करें
6
नापसंद करें

वरना, रहने दे लिखने को

रचनाकार : कुलवंत हैप्पी तुम्हें बिकना है,यहाँ टिकना है,तो दर्द से दिल लगा लेदर्द की ज्योत जगा लेलिख डाल दुनिया का दर्द, बढ़ा चढ़ाकररख दे हर हँसती आँख रुलाकरहर तमाशबीन, दर्द देखने को उतावला हैबात खुशी की करता तू, तू तो बावला हैमुकेश, शिव, राजकपूर हैं देन
पसंद करें
2
नापसंद करें

20 साल का संताप, सजा सिर्फ दो साल!

देश का कानून तो कानून, सजा की माँग करने वाले भी अद्भुत हैं। बीस साल का संताप भोगने पर सजा माँगी तो बस सिर्फ दो साल। जी हाँ, हरियाणा के बहु चर्चित रूचिका गिरहोत्रा छेड़छाड़ मामले जिरह खत्म हो चुकी है, और फैसला 20 मई को आना मुकर्रर किया गया है, लेकिन हैरानी
पसंद करें
1
नापसंद करें

हैप्पी अभिनंदन में शिवम मिश्रा

ब्लॉग ने पूरे हिन्दुस्तान को एक मंच पर ला खड़ा किया है, ब्लॉगिंग के बहाने हमको देश के कोने कोने का हाल जानने को मिल जाता है। देश का कितना बड़ा भी न्यूज पेपर हो, लेकिन आज वो ब्लॉग जगत के मुकाबले बहुत छोटा है। अखबार गली कूचों में बांट कर रह गया है, कारोबार
पसंद करें
0
नापसंद करें

आज भी हीर कहाँ खड़ी है?

कुलवंत हैप्पी समय कितना आगे निकल आया, जहाँ साइंस मंगल ग्रह पर पानी मिलने का दावा कर रही, जहाँ फिल्म का बज़ट करोड़ों की सीमाओं का पार कर रहा है, जहाँ लोहा (विमान) आसमाँ को छूकर गुजर रहा है, लेकिन फिर भी हीर कहाँ खड़ी है? रांझे की हीर। समाज आज भी हीर की
पसंद करें
3
नापसंद करें

माँ दिवस पर "युवा सोच युवा खयालात" का विशेषांक

अगर आसमाँ कागद बन जाए, और समुद्र का पानी स्याही, तो भी माँ की ममता का वर्णन पूरा न लिख होगा, लेकिन फिर शायरों एवं कवियों ने समय समय पर माँ की शान में जितना हो सका, उतना लिखा। शायरों और कवियों ने ही नहीं महात्माओं, ऋषियों व अवतारों ने भी माँ को भगवान से
पसंद करें
4
नापसंद करें

हैप्पी अभिनंदन में यशवंत महेता "फकीरा"

क्षमा चाहता हूँ, पिछले मंगलवार को मैं आपके सामने किसी भी ब्लॉगर हस्ती को पेश नहीं कर पाया। समय नहीं था कहना तो केवल बहाना होगा, इसलिए खेद ही प्रकट करता हूँ।हैप्पी अभिनंदन में आज आप जिस ब्लॉगर हस्ती से मिलने जा रहे हैं, उनको अनुभवी जनों और बुद्धिजीवियो का
पसंद करें
5
नापसंद करें

लफ्जों की धूल-6

लेखक कुलवंत हैप्पी(1)जिन्दगी सफर है दोस्तो, रेस नहीं,रिश्ता मुश्किल टिके, अगर बेस नहीं,वो दिल ही क्या हैप्पी जहाँ ग्रेस नहीं,(2)कभी नहीं किया नाराज जमाने को,फिर भी मुझसे एतराज जमाने को, जब भी भटकेगा रास्ते से हैप्पी, मैं ही दूँगा आवाज जमाने को(3)क्या
पसंद करें
7
नापसंद करें

इससे बड़ी दुर्घटना क्या होगी?

लेखक कुलवंत हैप्पीजिन्दगी सफर थी, लेकिन लालसाओं ने इसको रेस बनाकर रख दिया। जब सफर रेस बनता है तो रास्ते में आने वाली सुंदर वस्तुओं का हम कभी लुत्फ नहीं उठा पाते, और जब हम दौड़ते दौड़ते थक जाते हैं अथवा एक मुकाम पर पहुंचकर पीछे मुड़कर देखते हैं तो बहुत कुछ
पसंद करें
7
नापसंद करें

चर्चा विराम का नुस्खा : अधजल गगरी छलकत जाय

लेखक कुलवंत हैप्पी  यह कहावत तब बहुत काम लगती है, जब खुद को ज्ञानी और दूसरे को मूर्ख साबित करना चाहते हों। अगर आप चर्चा करते हुए थक जाएं तो इस कहावत को बोलकर चर्चा समाप्त भी कर सकते हैं मेरी मकान मालकिन की तरह। जी हाँ, मेरी जब जब भी मेरी मकान मालकिन
पसंद करें
3
नापसंद करें

नित्यानंद सेक्स स्केंडल के बहाने कुछ और बातें

लेखक कुलवंत हैप्पी नई दिल्ली से इंदौर तक आने वाली मालवा सुपरफास्ट रेलगाड़ी की यात्रा को मैं कभी नहीं भूल सकता, अगर भूल गया तो दूसरी बार उसमें यात्रा करने की भूल कर बैठूँगा। इस यात्रा को न भूलने का एक और दूसरा भी कारण है। वो है, हमारे वाले कोच में एक देसी
पसंद करें
3
नापसंद करें

लफ्जों की धूल-5

(1)कुलवंत हैप्पीअगर हिन्दु हो तो कृष्ण राम की कसम मुस्लिम हो तो मोहम्मद कुरान की कसमघरों को लौट आओ, हर सवाल का जवाब आएगाहैप्पी हथियारों से नहीं, विचारों से इंकलाब आएगा(2)नजरें चुराते हैं यहाँ से, वहीं क्यों टकराव होता हैचोट अक्सर वहीं लगती है हैप्पी यहाँ
पसंद करें
6
नापसंद करें

वत्स, तुम रो क्यों रहे हो : पीएम टू शशि थरूर

लेखक  कुलवंत हैप्पी एक बार की बात है, एक व्यक्ति रोता हुआ घर जा रहा था, रास्ते में रोककर एक साधु ने उससे पूछा, "वत्स, तुम रो क्यों रहे हो"। तो उसने कहा कि उसका साईकिल चोरी हो गया। साधु ने उसकी बात सुनते ही कहा, "भगवान ने तुमसे साईकिल छीना है,
पसंद करें
5
नापसंद करें

जीत है डर के आगे

ड्यू के टीवी विज्ञापन की टैग-लाईन 'डर के आगे जीत है' मुझे बेहद प्रभावित करती है, नि:संदेह औरों को भी करती होगी। सच कहूँ तो डर के आगे ही जीत है, जीत को हासिल करने के लिए डर को मारना ही पड़ेगा, वरना डर तुम को खा जाएगा। पिछले दिनों रिलीज हुई फिल्म "माई नेम
पसंद करें
3
नापसंद करें

ओशो सेक्स का पक्षपाती नहीं

खेतों को पानी दे रहा था, और खेतों के बीचोबीच एक डेरा है, वैसे पंजाब के हर गाँव में एकाध डेरा तो आम ही मिल जाएगा। मेरे गाँव में तो फिर भी चार चार डेरे हैं, रोडू पीर, बाबा टिल्ले वाला, डेरा बाबा गंगाराम, जिनको मैंने पौष के महीने में बर्फ जैसे पानी से
पसंद करें
4
नापसंद करें

लफ्जों की धूल-4

(1)जिन्दगी का जब, कर हिसाब किताब देखालड़ाई झगड़े के बिन, ना कुछ जनाब देखावो नहीं करते बात दंगे फसाद की,झुलसता जिन्होंने दिल्ली पंजाब देखा।कभी हिन्दु-मुस्लिम तो कभीबिछड़ता सतलुज जेहलम चेनाब देखा। अमन की गूँज हो हर तरफ हैप्पी ने तो बस इतना सा ख्वाब
पसंद करें
1
नापसंद करें

लफ्जों की धूल-3

(1)दिमाग बनिया, बाजार ढूँढता हैदिल आशिक, प्यार ढूँढता हैहैप्पी का पागलपन देखेंवो बंदों में परवरदिगार ढूँढता है(2)मैं तुम्हें प्यार करता हूँ,कहकर बताया तो क्या बताया,तू तू मैं मैं चलती रही,खुद को गंवाया तो क्या गंवायाटूटते ही कहा बेवफाऐसा इश्क कमाया तो
पसंद करें
5
नापसंद करें

शशि थरूर से सीखे, सुर्खियाँ बटोरने के ट्रिक

अखबारों की सुर्खियों में कैसे रहा जाता है आमिर खान या किसी हॉलीवुड हस्ती से बेहतर विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर जानते हैं। यकीन न आता हो, तो पिछले कई महीनों का हिसाब किताब खोलकर देखें, तो पता चलेगा कि शशि थरूर भी राखी सावंत की तरह बिना किसी बात के
पसंद करें
6
नापसंद करें

हैप्पी अभिनंदन में संगीता पुरी

श्रीमति संगीता पुरी जीहैप्पी अभिनंदन में आज आप जिस ब्लॉगर शख्सियत से रूबरू होने जा रहे हैं, वो जहाँ एक तरफ हमें गत्यात्मक ज्योतिष ब्लॉग के जरिए भविष्य व वर्तमान की स्थिति से अवगत करवाती हैं, वहीं दूसरी ओर 'हमारा खत्री समाज' ब्लॉग के जरिए हमें इतिहास के
पसंद करें
6
नापसंद करें

अलविदा ब्लॉगिंग...हैप्पी ब्लॉगिंग

कई महीने पहले बुरा भला के शिवम मिश्रा जी  चुपके से कहीं छुपकर बैठ गए, फिर हरकीरत हीर ने अचानक जाने की बात कही, किंतु वो लौट आई। किसी कारणवश मिथिलेश दुबे भी ब्लॉग जगत से भाग खड़े हुए थे, लौटे तो ऐसे लौटे कि न लौटे के बराबर हुए पड़े हैं। अब एक कलम के
पसंद करें
4
नापसंद करें

क्या गोलियों व बमों से खत्म जो जाएगा नक्सलवाद?

पिछले दिनों हुए नक्सली हमले के बाद भाजपा की सीनियर महिला नेता सुषमा स्वराज का बयान आया कि सेना की मदद से नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाए। उनके कहने का भाव था कि नक्सलवादियों की लाशों के ढेर बिछा दिए जाएं। उस बयान को पढ़ने के बाद दिमाग में एकाएक एक सवाल आ
पसंद करें
6
नापसंद करें

हैप्पी अभिनंदन में विनोद कुमार पाण्डेय

विनोद कुमार पाण्डेय जीइस बार हैप्पी अभिनंदन में बनारस की गलियाँ छोड़, नोयडा के 62 सेक्टर में जिन्दगी के हसीं पलों का आनंद लेने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर विनोद कुमार पाण्डेय जी पधारे हैं, जो अक्सर मिलते हैं 'मुस्कराते पल-कुछ सच कुछ सपने' ब्लॉग विला पर। वो
पसंद करें
2
नापसंद करें

मुस्कराते क्यों नहीं

Photo by Google Search & Editing by meश्रीगणेश से करते हैं शुरू जब हर कामतो माँ-बाप को दुनिया बनाते क्यों नहीं।बुरी बातों को लेकर बहस करने वालोंफिर अच्छी बातें को फैलाते क्यों नहीं।मन में बातों का अंबार, हाथ में मोबाइलतो मित्र का नम्बर मिलाते क्यों
पसंद करें
6
नापसंद करें

सेक्स एजुकेशन तो आम है, आगे की बात करें

देश में सेक्स एजुकेशन को लेकर अनूठी बहस चल रही है, कुछ रूढ़िवादी का विरोध कर रहे हैं और कुछ इसके पक्ष में बोल रहे हैं। लेकिन कितनी हैरानी की बात है कि किसी शिक्षा की बात कर रहे हैं हम सब, जो इस देश में आम है। सचमुच सेक्स शिक्षा इस देश में आम है, वो बात
पसंद करें
3
नापसंद करें

ह्यूमन एंटी वायरस

हर बात को लेकर विरोधाभास तो रहता ही है, जैसे आपने किसी को कहते हुए सुना होगा "मुफ्त में कोई दे, तो ज़हर भी खा लें", वहीं किसी को कहते हुए सुना होगा "मुफ्त में कोई दवा भी न लें, सलाह तो दूर की बात"। हम मुफ्त में मिला ज़हर खा सकते हैं, लेकिन मुफ्त में मिली
पसंद करें
5
नापसंद करें

तेरे इंतजार में

नागदा के रेलवे स्टेशन का  एक दृश्य /फोटो: कुलवंत हैप्पीआँखें बूढ़ी हो गई, तेरे इंतजार मेंऔर पैर भी जवाब दे चुके हैंफिर भी दौड़ पड़ती हूँडाकिए की आवाज सुनकरशायद कोई चिट्ठी हो मेरे नाम कीजिसे लिखा तुमने होहर दफा निराश होकर लौटती हूँदरवाजे सेरेल गाड़ी की
पसंद करें
3
नापसंद करें

नेता, अभिनेता और प्रचार विक्रेता

जब हम तीनों बहन भाई छोटे थे, तब आम बच्चों की तरह हमको भी टीवी देखने का बहुत शौक था, मुझे सबसे ज्यादा शौक था। मेरे कारण ही घर में कोई टीवी न टिक सका, मैं उसके कान (चैनल ट्यूनर) मोड़ मोड़कर खराब कर देता था। पिता को अक्सर सात बजे वाली क्षेत्रिय ख़बरें सुनी
पसंद करें
3
नापसंद करें

कुछ क्षणिकाओं की पोटली से

1.हम भी दिल लगाते, थोड़ा सा सम्हलपढ़ी होती अगर, जरा सी भी रमल-: रमल- भविष्य की घटनाएं बताने वाली विद्या(2)मुश्किलों में भले ही अकेला था मैं, खुशियों के दौर में,ओपीडी के बाहर खड़े मरीजों से लम्बी थी मेरे दोस्तों की फेहरिस्त।ओपीडी-out patient department
पसंद करें
2
नापसंद करें

आओ करते हैं कुछ परे की बात

विज्ञापन बहुत रो लिए किसी को याद करनहीं करनी, अब मरे की बातखिलते हुए फूल, पेड़ पौधे बुला रहेछोड़ो सूखे की, करो हरे की बातआलम देखो, सोहणी की दीवानगी काकब तक करते रहेंगे घड़े की बातआओ खुद लिखें कुछ नई इबारतबहुत हुई देश के लिए लड़े की बातचर्चा, बहस में ही गुजरी
पसंद करें
3
नापसंद करें

कंधे बदलते देखे

चिता पर तो अक्सर लाशें जलती हैं दोस्तो,मैंने तो जिन्दा इंसान चिंता में जलते देखे।तब जाना, जरूरत न पैरों की चलने के लिएजब भारत में कानून बिन पैर चलते देखे।फरेबियों को जफा भी रास आई दुनिया में,सच्चे दिल आशिक अक्सर हाथ मलते देखे।सुना था मैंने, चार कंधों पर
पसंद करें
1
नापसंद करें

मिलन से उत्सव तक

तुमने मुझे गले से लगा लियापहले की भांति फिर अपना लियान कोई गिला किया,नाहीं शिकवा शिकायतनाहीं दी मुझे कोई हिदायतबस पकड़कर चूम लिया मुझेमानो तुम, मेरे ही इंतजार में थेतुम सच जानो,मैं इस स्पर्श को भूल सा गया थाकिसी के किए हुए एहसान की तरहमैं भी उलझकर रह गया
पसंद करें
3
नापसंद करें

मन की बातें...जो विचार बन गई

हँसता हुआ चेहरा, खिलता हुआ फूल, उगता हुआ सूर्य व बहता हुआ पानी रोज देखने की आदत डालो। मुस्कराना आ जाएगा। -: कुलवंत हैप्पीईश्वर को आज तक किसी ने परिभाषित नहीं, लेकिन जो मैंने जाना, वो ईश्वर हमारे भीतर है, और कला ही उसका असली रूप है। तुम्हारी कला ही तुम को
पसंद करें
2
नापसंद करें

कुछ टुकड़े शब्दों के

(1)तेरे नेक इरादों के आगे,सिर झुकाना नहीं पड़ताखुद ब खुद झुकता हैए मेरे खुदा।(2)मेरे शब्द तो अक्सर काले थे,बिल्कुल कौए जैसे,फिर भीउन्होंने कई रंग निकाल लिए।(3)कहीं जलते चिराग-ए-घीतो कहीं तेल को तरसते दीए देखे।(4)एक बार कहा थातेरे हाथों की लकीरों मेंनाम
पसंद करें
0
नापसंद करें

कुछ टुकड़े शब्दों के

(1)तेरे नेक इरादों के आगे,सिर झुकाना नहीं पड़ताखुद ब खुद झुकता हैए मेरे खुदा।(2)मेरे शब्द तो अक्सर काले थे,बिल्कुल कौए जैसे,फिर भीउन्होंने कई रंग निकाल लिए।(3)कहीं जलते चिराग-ए-घीतो कहीं तेल को तरसते दीए देखे।(4)एक बार कहा थातेरे हाथों की लकीरों मेंनाम
पसंद करें
0
नापसंद करें

आओ चलें आनंद की ओर

हिन्दुस्तान में एक परंपरा सदियों से चली आ रही है, बचपन खेल कूद में निकल जाता, और जवानी मस्त मौला माहौल के साथ। कुछ साल परिवार के लिए पैसा कमाने में, अंतिम में दिनों में पूजा पाठ करना शुरू हो जाता है, आत्मशांति के लिए। हम सारी उम्र निकाल देते हैं, आत्म को