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झंकृत

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता कवि कुलवंत सिंह का गीत 'झंकृत'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... झन - झन झंकृत हृदय आज हैवपु में बजते सभी साज हैं ।पी आने का मिला भास हैमिटेगा चिर विछोह त्रास है ।मंद - मंद मादक बयार
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प्रणय गीत

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता कवि कुलवंत सिंह का प्रणय-गीत. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... गीत प्रणय का अधर सजा दो ।स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।शीतल अनिल अनल दहकाती,सोम कौमुदी मन बहकाती,रति यामिनी बीती जाती,प्राण
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ब्रजेश पाठक मौन - की स्मृति में रचा गया गीत

ब्रजेश पाठक मौनमौन की वाणी मधुरथा मौन का हंसना मधुर,मौन का चिंतन प्रखरथे मौन के मुखरित अधर ?शून्य में है वह तिरोहितमुक्ति ले जन्मों का बंधन,याद रखना यादें संजोअब नही करना है क्रंदन .नीर न नयनों में लानास्मृतियों को चंदन बनाना,स्मृति पटल पर ओस कण सीतात की