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जीवन को दिशा तभी मिलेगी जबकि कुरआन समझकर पढ़ा जाये।

मौलाना से प्रश्न पूछा गया कि कुरआन की आयतों को समझें कि उसे हिफ़्ज़ यानि कंठस्थ करें।जवाब- कुरआन को विचार करके पढ़ो। जिसे रमज़ान में तरावीह पढ़ानी हो वह हिफ़्ज़ करे।मौलाना के कहने का तात्पर्य यह था कि जीवन को दिशा तभी मिलेगी जबकि उसे समझकर पढ़ा जाये। कुरआन एक
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ताकि हरेक जान ले कि सच्चा मुसलमान कैसा होता है ? Submission to Allah, The real God .

बहन फ़िरदौस जी , विचारोत्तेजक लेख के लिए बधाई ।मैं आपसे बिल्कुल सहमत हूं कि इनसान के कल्याण के लिए इसलाम काफ़ी है मुसलमानों को आरक्षण के चक्कर में पड़ने के बजाए इसलाम को मज़बूती से थामना चाहिये ।असल बात यह है कि हिन्दुस्तान में लोग वर्णवाद से घबराकर मुसलमान
 
DR. ANWER JAMAL
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क्या कुरआन को समझ कर पढना ज़रुरी है? भाग - 3 Understand Quran While Reading Part - 3

इस लेख के पहले दो भाग आपने पढें होगें। अगर नही पढें है तो यहां पढ सकते है.....भाग-१, भाग-२।जो लोग कहते है कि आप अरबी कुरआन गैर-मुस्लमान को देगें और आपको सज़ा मिलेगीं तो मै कहता हुं की कोई हर्ज नही। अगर अल्लाह तआला मुझे ज़िम्मेदार ठहरायेगें अरबी कुरआन
 
काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif
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क्या कुरआन को समझ कर पढना ज़रुरी है? भाग- १

कुरआन मजीद अल्लाह तआला की आखिरी वही (पैगाम) अपने आखिरी पैगम्बर मुहम्मद रसुल अल्लाह सल्लाहोअलैह वस्सलम पर नाज़िल की थी। कुरआन मजीद सारी दुनिया मे सबसे बेहतरीन किताब है, वो इन्सानियत के लिये हिदायत है, कुरआन मजीद हिकमत का झरना है और जो लोग नही मानते उन्के
 
काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif
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786 का अर्थ "बिस्मिल्लाह" नही है.... 786 Does Not Mean "Bismillah". Myth Of 786.

(नोट :- सबसे पहले मैं अपने रेगुलर ई-मेल रीडर से माफ़ी चाहता हूं की मैं एक महीने से कोई लेख नही लिख सका। बिजली की कमी और दुसरे कामों की वजह से मैं लिख नही सका। रमज़ान के इस पाक महीने मेरे सारे लेख मुसलमानों के बीच रमज़ान को लेकर फ़ैली गलतफ़हमियों को दुर करने
 
काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif
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