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जब वफादार ही बेवफा हो जाये , तो क्या कीजे ----

बेशक कुत्ता एक वफादार प्राणी है । लेकिन यदि आपके प्रिय टॉमी , मोती , जूजू या पूपू को कोई गली का कुत्ता काट ले और उसे रेबीज़ हो जाये तो वही स्वामिभक्त , जान से भी प्यारा आपका पालतू कुत्ता , आपकी जान का दुश्मन बन सकता है । जी हाँ , मनुष्यों को रेबीज़ का
 
डॉ टी एस दराल
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आदमी

हाथी सड़क पर ,मद मस्त जा रहा था कुत्ता भोंका,हाथी को नागवार गुजरा सूंड में लपेट कर जो पटकनी दी, कुत्ते की दुम सीधी हो गयीकुत्ता माँयुस हो गया ,बोला तोड़ देते , अगर मेरी टांग,कुछ दिन में ठीक हो जाती पर आपने ने तो आदमी बना दिया ................
 
makrand
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डाग शो बनाम कुत्ता नहीं श्वान ...

व्यंग डाग शो बनाम कुत्ता नहीं श्वान ...विवेक रंजन श्रीवास्तव ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी रामपुर , जबलपुर मो ९४२५८०६२५२ मेरे एक मित्र को पिछले दिनो ब्लडप्रेशर बढ़ने की शिकायत हुई , तो अपनी ठेठ भारतीय परम्परा के अनुरुप हम सभी कार्यलयीन मित्र उन्हें देखने
 
Vivek Ranjan Shrivastava
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नव वर्ष का उपहार

नववर्ष का प्रथम था वारकुत्ते को आया मुझपर प्यारडर कर उसको मारा चाँटाउसने मुझे पलटकर काटामैंने किया डॉक्टर को फोनडॉक्टर बोला हैलो कौनमैने कहा कुत्ते ने मुझे काटामैने मारा उसको चाँटामै हो रहा हूँ बीमारआपका है इन्तजारडॉक्टर ने कहा तू मेरे उसूल को नहीं
 
ajit kumar mishra
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एक प्रजाति जो सदियों से हमारे साथ है।

आज मैने एक फ़िल्म देखी “एट बिलो” Eight below जो आठ कुत्तो की कहानी है। ये दूसरी बार है जब मै यह फ़िल्म देख कर एक बार फ़िर द्रवित हो गया, ये स्लेड कुत्ते एक टीम का हिस्सा होते, जो अंटार्कटिका के बर्फ़ीले स्थानों में फ़िसलने वाली गाड़ी को घसीटते है।
 
Krishna Kumar Mishra
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बस. .

कितना बुरा लगता है अपने आप को उखाड़ना! नए रोपन से डर लगता है न। हम टालते रहते हैं - बस कुछ दिन और। बस बस करते ही एक दिन कहीं और बस जाते हैं- अपने को उखाड़। और नई बस्ती बस कितनी अपनी सी हो जाती है - मज़दूरों के बच्चे, सफाई वाला, पेपर वाला, सामने का अनजान
 
गिरिजेश राव
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कैसे जियोगे जल अपनी जिंदगी

शिकारियों ने मार गिराया शेर को पालतू कुत्तों के साथ, शेर की संख्या अब जल्दी हो जायेगी निल...., लेकिन शेर नहीं बदलता अपनी आदत, बारिश में तलाश करना साये की, पेड हो या फिर कोई मुंडेर, हर पंछी की यही जरूरत होती है। मैंने बाद में जाना कि बादलों के पार....
 
mediajantantra
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नए ज़माने में पुरानी माँ

नए ज़माने के हिसाब से ना ढलना था ना ढल पाई माँ बेडरुम और ड्राइंगरुम में फ़र्क नहीं समझती भले ही कोई कितना ही खास आदमी बैठा हो झट सोफ़े पर पसर जाती है माँ लेब्राडोर नस्ल के शानदार चिंकी को इतने बरस बीत गये अभी तक कुत्ता ही कहती है माँ घर का पोंछा लगाती ब