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प्याज सुमिरन - कुण्डलियाँ

छः दशकों की उपलब्धिछः दशकों में हो गया सारा राज सुराज ।घुसी तेल में ड्राप्सी, दुर्लभ आलू-प्याज ।दुर्लभ आलू-प्याज, दूध पानी से सस्ता ।पतली होती कभी तो कभी हालत खस्ता ।कह जोशीकविराय देखना नई सदी में ।मछली बचे न एक ग्राह ही ग्राह नदी में ।भले ही अणुबम
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भ्रष्टाचार

फैल रहा है देश में कैसा भ्रष्टाचार देख रहे हैं सब खड़े बेबस और लाचार बेबस और लाचार अगर कोई न चेता खा जायेंगे बेच इसे आगे ये नेता कैसी त्रासदी देश हमारा झेल रहा है भ्रष्टाचार बन ज़हर रगों में फैल रहा है
 
अखिलेश सोनी