पसंद करें
0
नापसंद करें

लाख शब्दों में एक बात..बंद करो बंद करो!

बस और नहीं..कहा ना अब और नहीं झेला जाता यह शब्दों और समय के साथ होता हुआ दुर्व्यवहार। आप ही कहिये कब तक झेलें हम इन अल्ल्हड़ और पढ़े लिखे जाहिलों की जमात को। जब बोलना शुरू करते हैं तो ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेते। एक बात को जब तक पचास तरीके से न बोल लें
 
पियूष अग्रवाल
पसंद करें
3
नापसंद करें

मेरा नाम केसर है!

नाम : केसरगाँव : मोत्वाराजिला: अमीरपुर , मध्य प्रदेशयह कहानी किसी छोटे से गाँव में रहने वाली अबला, मासूम याज़ुल्म की पीड़ित औरत की नहीं है बल्कि एक साधारण भेष मेंछुपी असाधारण केसर की है जो आजकल महानगर दिल्ली केकनाट प्लेस में फल बेचती है। दो दिन पहले
 
पियूष अग्रवाल
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरा त्यागपत्र कबूल करें - १४११

श्रीमान प्रधान मंत्री जी और मेरे प्यारे दोस्तों,जानता हूँ की आज़ाद भारत में सांस लेते ६३ साल बीत चुके हैं और यह मेरा पहला ख़त है, पर बीते कुछ वर्षों में कुछ ऐसी घटनाएँ घटी की मुझे यह पत्र लिखना पड़ रहा है।मुझे आज भी याद है वह दिन जब गणतंत्र भारत के
 
पियूष अग्रवाल
पसंद करें
0
नापसंद करें

फीके पड़ते होली के रंग

सबसे पहले मैं अपने सभी पाठकों को होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं देना चाहता हूँ। माफ़ी चाहता हूँ की सेहत ख़राब होने के चलते मैं इस साल होली नहीं मना सका परन्तु दिल में जोश फिर भी हर साल की तरह अपनी पूरी सीमा पे था। होली का त्यौहार ही कुछ ऐसा है की हर इंसान
 
पियूष अग्रवाल
पसंद करें
3
नापसंद करें

रेसोलूशन मुर्गा

साल २०१० का पहला दिन और हर साल की तरह इस साल भी मेरे कानों में रेसोलुशन नामक मुर्गा सुबह सुबह बांक दे चुका था। रजाई को मैंने कस के थाम रखा था परन्तु वोह मुर्गा मुझे यह याद दिलाने पे आमादा था की २०१० में मुझे जल्दी उठना ही है। खैर मैंने भी हार नहीं मानी,