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तेरे लबों के बोल, रंगीन हैं, रंगों की तरह! त्रिवेणी की कोशिश!

बरसते हैं यूँही रंगों की तरह,और दिल को गुलज़ार कर जाते हैं,!!!तेरे लबों के बोल, रंगीन हैं, रंगों की तरह.....
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काश उनको भी हम ये बता पाते... त्रिवेणी की कोशिश!

थी तरस हमको भी मुहब्बत की,थी तरस हमको भी दीदार-ऐ-यार की,!!!काश उनको भी हम ये बता पाते...
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लगता है आज फिर मेरी नमाज़ क़ज़ा होगी। त्रिवेणी की कोशिश!

यूँ हवा में उड़ती हुई ज़ुल्फें तेरी,और उनमें मचलते हुए मेरे अरमान,!!!लगता है आज फिर मेरी नमाज़ क़ज़ा होगी।
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काश वक़्त मुड़कर चला आता। त्रिवेणी की कोशिश!

चलता जा रहा हूँ बस यूँही,उन्ही रास्तों पर तुम्हारी यादों के साथ,!!!काश वक़्त मुड़कर चला आता।
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ये झूठ इतना खूबसूरत क्यूँ होता है? त्रिवेणी की कोशिश!

यूँ बरसते हैं उसकी आँखों से आंसू,जैसे सीप से मोती निकलकर बिखर रहे हों,!!!ये झूठ इतना खूबसूरत क्यूँ होता है?
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हमने हँसकर क़ुबूल उसको कर लिया। त्रिवेणी की कोशिश!

था मुक़द्दर में कोई,काँटा, फूल के साथ,हमने हँसकर क़ुबूल उसको कर लिया।
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ख़ंजर! हाल ऐ दिल !

उसने मुझे देखा और ख़ंजर छुपा लिया,मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा लिया,!!!लगता है बाकी अब भी है कुछ शर्म उसमे...
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हो रहा है जो भी कुछ,इसको ऐसे तो नही होना था। हाल ऐ दिल!

आज फिर कुछ सालों के बाद,फिर वहीँ खड़ा हूँ उसी दोराहे पर,फिर सोच रहा हूँ कहाँ जाऊँ,आज खड़ा इस दोराहे पर,हो रहा है जो भी कुछ,इसको ऐसे तो नही होना था!हूँ बेचारा आज फिर,हूँ लाचार सा,देखता हूँ सबको आते जाते,मगर ख़ुद हूँ बीमार सा,जाने इंतज़ार है मुझे किस बात
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यूँही नहीं कोई, छोड़ के जाता किसीको! हाल ए दिल!

आज ऑरकुट पे घुमते घुमते एक फोरम में, एक सवाल से दो चार हुआ. किसी लड़की ने पूछा के क्या सिर्फ लडकियां ही बेवफा होती हैं? लड़के बेवफा नहीं होते क्या? सवाल जायज़ था, शायद उस फोरम को बनाने वाला भी सोच रहा होगा के ये क्या कह दिया. बेवफा तो कोई भी हो सकता है,