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रे माधो, तू देखना,

रे माधो, तू देखना,इक दिन ,मैं इस चाँद का,एक टुकडा तोड़ कर,तेरे माटी के,दिए में पिघलाऊंगा ॥रे माधो, तू देखना,इक दिन,इन तारों को,बुहार कर एक साथ,रगडूंगा, तेरे आँगन में,आतिशबाजी , करवाउंगा मैं॥रे माधो, तू देखना,इक दिन,तू नहीं जायेगा,पंचायत में हाजिरी
 
अजय कुमार झा
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हुआ जो , हादसा, मेरे साथ, जमाने भर , के लिए, वो बस, एक ख़बर थी

हुआ जो ,हादसा,मेरे साथ,जमाने भर ,के लिए,वो बस,एक ख़बर थी॥मैं तो,सतर्क था,और ,सचेत भी,मगर जिसने ,हमें रखा,अपनी ठोकरों पर,शायद उसकी ही,कहीं और ,नज़र थी॥मैंने छोड़ दिए,कई रास्ते,और कई,मंजिलें भी,जिसके लिए,वो तो,पहले ही,किसी और की,हमसफर थी॥मैं ढूँढ ,रहा
 
अजय कुमार झा
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मैं खुद ही खुद को प्यार करने लगा ....

जब लगे,दुत्कारने,मुझको सभी,परित्यक्त ,सा हर कोई,व्यवहार करने लगा॥खुद को,उठाया,गले से,लगाया,में खुद ,खुद को,ही प्यार करने लगा॥जीता रहा,जिस दुनिया को,अपने,सीने से लगाए,मुझे अपने से,दूर जब ये,संसार करने लगा॥खुद को,सम्भाला,संवारा-सराहा,स्नेह से,पुचकारा,खुद
 
अजय कुमार झा