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अंकल कुछ नहीं होवेगा

वसंत पंचमी भी जा चुकी है लेकिन दिल्ली की ठंड है कि अभी जाने का नाम नहीं ले रही. कॉफी हाउस में कुछ कॉफी, कुछ राजनीति और कुछ कला-साहित्य पीने के बाद प्रेस क्लब पहुंचा. कोई अच्छा साथी नहीं मिला तो अपनी आउटडेटेड मोटरसाइकिल चलाते हुए सूखा-सूखा घर लौट आया,
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यदा-यदा हि…

‘यदा-यदा हि धर्मस्य….धरा पर जब-जब दुर्जन, दुराचारी बढ़ेंगे, भले लोग छले जाएंगे…मैं अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार करने आऊंगा…’ ईश्वर ने गीता में कहा था, लिखा नहीं था. जिसने लिखा, उसने लिखने के बाद कभी उससे जिक्र तक नहीं किया. आरती,
 
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धूर्त्त लोमड़ी

जंगल से गुजरते कुत्ते का सामना लोमड़ी से हुआ तो वह चकरा गया. कारण था, लोमड़ी का बदला हुआ रूप. माथे पर तिलक, गले में रुद्राक्ष माला, कंधों पर रामनामी दुपट्टा. वह लोमड़ी के स्वभाव को जानता था. बात-बात में झूठ बोलना, कदम-कदम पर धोखा देना उसकी आदत थी. यह काम
 
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आक्रोश

शाम का समय. कुत्ता घूमता हुआ बस्ती के बाहर आया और रास्ते में एक झोपड़ी को देख ठिठक गया. झांककर देखा तो भीतर, हाथ में झाड़ू लिए एक बुढ़िया गुस्से से लाल-पीली हो रही थी— ‘आ, तू भी आ मुंह झौंसे, तुझे भी देखूं!’ बुढ़िया कुत्ते को देखते ही बरस पड़ी. कुत्ता
 
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आडंबर

कसाई के पीछे घिसटती जा रही बकरी ने सामने से आ रहे संन्यासी को देखा तो उसकी उम्मीद बढ़ी. मौत आंखों में लिए वह फरियाद करने लगी— ‘महाराज! मेरे छोटे-छोटे मेमने हैं. आप इस कसाई से मेरी प्राण-रक्षा करें. मैं जब तक जियूंगी, अपने बच्चों के हिस्से का दूध आपको
 
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मजबूर ईश्वर

ईश्वर समझता है कि बहुत दिन हुए भक्तों का प्रसाद खाते हुए. सोचता है कि अब तो भक्तों के लिए कुछ करे. जानता है कि हर भक्त कोई न कोई आस लेकर मंदिर आता है. महंगाई का जमाना है. पहले एक पैसा खर्च करके दस लाख की कामना करता था, आजकल प्रसाद दस रुपये का [...]
 
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अमृत-भोज

सूरज सिर पर उतर आया था. एक के बाद एक कई घरों में झांकने के बावजूद कुत्ते को निराश लौटना पड़ा था. उसे अपने जीवन से घृणा होने लगी. किंतु रोटी जीवन की सबसे बड़ी अनिवार्यता, उसकी चाहत में घर-घर जाना, दर-दर भटकना, लोगों की लात-बात, मार-दुत्कार सहना मजबूरी
 
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कवियित्री

कुत्ता कवियों और साहित्यकारों से बहुत प्रभावित था. हालांकि कविता उसके लिए दूर की कौड़ी थी. किंतु कवि की तान पर जब वह सैकड़ों व्यक्तियों को एक साथ अपनी गर्दन हिलाते देखता तो समझ जाता कि बहुत ऊंची बात कही गई है. उस दिन एक घर के सामने से गुजरते हुए कुत्
 
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ईश्वरपन

रात के अंधेरे में कुत्ता बस्ती की पहरेदारी कर रहा था. तभी उसकी निगाह एक आकृति पर पड़ी. खुद को गहरे काले लबादे में लपेटे हुए वह बस्ती की गलियों में चक्कर काट रही थी. कुत्ता उसे सावधान करने के लिए भौंका. इसपर वह आकृति पलट गई— ‘शी…!’ उसने चुप रहने
 
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धूर्त

मंदिर में बराबर-बराबर खड़े होकर पूजा करते दो भक्तों में से प्रत्येक को सहसा यह लगा कि ईश्वर उसी को देखकर मुस्करा रहे हैं. उन्होंने एक-दूसरे की आंखों में झांका, एक बोला— ‘देखा, भगवान मेरी ओर देखकर कैसे मुस्करा रहे थे. आज मेरी बर्षों की तपस्या सफल हुई.
 
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बेशरमी

भीषण गरमी का सताया हुआ कुत्ता नदी तट पर पहुंचा तो उसको लगा कि वह मौत के मुंह से बचकर वापस जीवन-नगरी आ पहुंचा है. कुछ न सोचते हुए उसने नदी में छलांग लगा दी. भूल गया कि जिस जगह उसने छलांग लगाई है, वह तीर्थस्थल के रूप में ख्यात है. और जिस दिन वह [...]
 
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आदमी दिल का बुरा नहीं होता

किसान ने अपने खेत को धूं-धूं जलते देखा और माथा पकड़ लिया. आग उसकी साल-भर की मेहनत और अरमानों पर पानी फेर चुकी थी. फसल ठीक-ठाक घर आ जाती तो वह इस बार पत्नी का ऑपरेशन करवा लेता, जिसे पिछले वर्ष डॉक्टर के जरूरी बनाने के बावजूट टालना पड़ा था. अब कैसे कटेगा
 
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स्वाभिमान

शहर की भीड़भाड़ से उकताया हुआ कुत्ता जंगल की ओर चल दिया. बस्ती से बाहर आते ही उसकी निगाह एक औरत पर पड़ी, सिर पर लकड़ियों का बड़ा-सा गट्ठर उठाए वह शहर की ओर जा रही थी. गट्ठर भारी होने के कारण उसे चलने में परेशानी हो रही थी. ‘इतना कठिन जीवन जीने वाला मनुष्य
 
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नकली ईश्वर

कुत्ता मंदिर के आगे से गुजर रहा था कि भीतर से आवाज सुनाई पड़ी. कुत्ते ने चौंककर गर्दन घुमाई. मंदिर के दरवाजे पर खड़े ईश्वर उसे बुला रहे थे. वह खिंचता चला गया. ‘सुनो, भीतर भोग में आए लड्डू, पेढ़ा, मेवा, मिष्ठान, खीर-पूरी, फल वगैरह रखे हैं, तुम उनमें से ज
 
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खुद को संवारो

हजारों श्रोताओं के बीच संत उपदेश दे रहे थे. ‘मनुष्यता बहुत ऊंची चीज है. हमें अपने लिए अपने परिवार, अपने राष्ट्र और अपने समाज के लिए उसके आदर्शों का पालन करना चाहिए. कैंसे आदर्श, यही कि हम बुराइयों से बचें, आपस में लड़ें-झगड़ें नहीं, मिलजुल-कर रहें मिलब
 
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शब्द बेकार नहीं जाते

प्रवचन चालू था, कुत्ता ठिठककर सुनने लगा. ‘पृथ्वी-पावक-जल- गगन-समीरा…पंचतत्व यह रचहिं शरीरा-इन पांच तत्वों की खरीद-फरोख्त करना इंसानियत के खिलाफ है. जब यह लगने लगे कि लोगों ने इन्हें धंधा बना लिया तो समझ लो कि सृष्टि का अंत निकट है.’ इससे अधिक क
 
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ईश्वर की हत्या

ईश्वर मर चुका है, हमने उसकी हत्या की है.’ नीत्शे का कहा जैसे ही कुत्ते ने सुना, उसके कान खड़े हो गए. वह घबरा गया. जो ईश्वर बिना हथियार कहीं आता-जाता नहीं, भूत, भविष्य, वर्तमान की खबर रखता है, उसकी हत्या भला कौन कर सकता है. और अगर हत्या हुई है तो ईश्वर
 
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लालच

बाजार से गुजरता हुआ कुत्ता सड़क किनारे दुकान सजाए बैठे ज्योतिषी को देख ठिठक गया. दोपहर का समय था. लोग अपने घरों-दफ्तरों में घुसे थे. सड़क वीरान थी, मानो सूरज का कोप शांत होने की प्रतीक्षा कर रही हो. ज्योतिषी को अकेला बैठे देख कुत्ते को चुहल सूझी. उसके
 
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