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किनारे

इस किनारे पर हम थे उस किनारे पर वो मिलने की आस थी , पर दुर था किनारा एक टक देख , लिये थी मिलने की आस आज लहरें भी थी शांत मिलन को देखने के लिये जमाने की थी नजर हमारे ओर मिलन की आस मे चल पडे किनारे से लहरों की ओर .....
 
Dhiraj Shah
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बिखरे सितारे ! ७) तानाशाह ज़माने !

पूजा की माँ, मासूमा भी, कैसी क़िस्मत लेके इस दुनियामे आयी थी? जब,जब उस औरत की बयानी सुनती हूँ, तो कराह उठती हूँ... लाख ज़हमतें , हज़ार तोहमतें, चलती रही,काँधों पे ढ़ोते हुए, रातों की बारातें, दिनों के काफ़िले, छत पर से गुज़रते रहे..... वो अनारकली तो नही
 
kshama
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शाम का उजाला

सुबह से हुयीआज शामखामोशकिनारों दे दी आवाजसाहिलों ने भी आज दिल्लगी की हमसेहमने भी सोचाचलो आज हम भी दिल्लगी करे साहिलों सेसाहिलों ने भी हमें लहरों से मिलायालहरों की भी कहानी अजीब हैउसका अपनापन भी हैबेगानापन भी हैबेवजह लोग उसे कतराते हैआज फैला डाली अपनी
 
धीरज शाह