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महिलायें तो यही सब पढ़ती हैं

औरतों की दुनिया में किताब ·       किरण पाण्डेय कुछ लिखकर कुछ पढ़कर सोतू जिस जगह सबेरे जागाउससे आगे बढ़कर सोभवानी प्रसाद मिश्रग्वालियर से बेंगलूर जा रही थी किसी स्टेशन पर गाडी रुकी तो एक पत्रिका वाला सामने से गुजरा। मैने
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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आदिवासियों की संघर्ष कथा

उनकी कहानियां हों, या कविताएँ या उपन्यास- रणेंद्र अपने लेखन में जनता के सरोकारों से अभिन्न रूप से जुड़े दिखते हैं. खास कर आदिवासी समुदाय की पीड़ा, उसका विस्थापन और उसका संघर्ष उनके लेखन में अधिक मुखर होता है.उनका ताजा उपन्यास ग्लोबल गांव के देवता पढ़िए.
 
Reyaz-ul-haque
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मेरी जिंदगी में किताबें - 3

ज्‍यादातर दोस्‍तों ने किताबें खरीदना छोड़ दिया है और किताबों के बारे में बात करना भी। गलती उनकी भी नहीं है। जीवन ही ऐसा है। तंख्‍वाह के अंकों में जीरो बढ़ाते जाने और कॅरियर में एक आला मुकाम हासिल करने के लिए लोग मुंह अंधेरे दफ्तरों के लिए निकलते हैं और रात
 
मनीषा पांडे
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मेरी जिंदगी में किताबें - 2

कितनी आसानी से किसी को सबकुछ देकर उसका सबकुछ छीना जा सकता है और वो उफ तक नहीं करेगा, उल्‍टे इस छीन जाने के बदले आपका एहसानमंद होगा। इलाहाबाद के वो साथी आज भी दिल्‍ली के पुस्‍तक मेलों में परिवार के साथ घूमते हुए मिल जाते हैं और आज जब किताबें न खरीद पाने
 
मनीषा पांडे
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मेरी जिंदगी में किताबें

कुछ दिन हुए किताबों के महामेले से लौटी हूं। पुस्‍तक मेले में जाना मेरे लिए किसी उत्‍सव की तरह होता है, हालांकि जानती हूं कि वहां से मनों निराशा और टनों उदासी के साथ वापस लौटूंगी। हिंदी किताबों का संसार हजार-हजार फांस बनकर आंखों में चुभता रहता है। छुटपन
 
मनीषा पांडे
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पांच किताबें: जिन्हें पढ़ने के बाद आप वो नहीं रहे, जो आप थे !

किताबों से हमारा ऐसा रिश्ता है जिसकी मिसाल ढूंढें नहीं मिलती। हर इंसान, जों अक्षर बांच लेता है, उसकी दुनिया में किताबों का एक या दूसरी तरह का स्थान है। ये सवाल जब हमने राम पदारथ से पूछा तो उन्होंने जों सूची बनाई उसे यहाँ हूबहू पेश करता हूँ।१ - अपनी खबर :
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क्या आप पुस्तक मेले जा रहे हैं?

साथियों आर्थिक विषयों पर लिखे मेरे लेखों की किताब 'शोषण के अभयारण्य' शिल्पायन प्रकाशन से छप कर आ गयी है।विस्तार के लिए यहाँ क्लिक करके पढ़ें।दूसरी किताब मार्क्स : जीवन और विचार संवाद प्रकाशन से प्रकाशित हुई है उसकी जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।और प्रेम
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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किताबें

किताबें किताबेंरंग बिरंगीछोटी-बड़ीमोटी-पतलीअलमारी में सेहर पल झाँकती हैं।फिर आकर पास मेरेहँसाती हैं, रुलाती हैंदेर तक मुझसे बतियाती हैंजब छोड़े सारी दुनियातब मेरा साथ निभाती हैं।"माँ"हाथ पकड़कर चलना सिखाती है"मुझे चाँद चाहिए"सपनो को पँख लगाती
 
सुशील कुमार छौक्कर
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जिसकी रोशनी में हम अपना संसार देखें : एरिक हॉब्सबाम की इतिहास की शानदार किताबें, हिंदी में

संवाद प्रकाशन से विश्व पुस्तक मेला (30 जनवरी, से 7 फरवरी, 2009, प्रगति मैदान, नई दिल्ली) के अवसर पर बीसवीं सदी के सर्वाधिक समादृत इतिहास ग्रंथों की 5 खंडों की श्रृंखला का प्रकाशन हो रहा है. मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस श्रृंखला के लेखक एरिक हाब
 
Reyaz-ul-haque
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विद्या रानी की कसम

याद है आपको... बचपन में हम कहा करते थे - विद्या रानी की कसम...और जब किताब से पांव छू जाता था तो उसे तीन बार माथे से लगाकर चूमते थे...कुछ लोग तो 7 बार माथे से लगाते और फिर 7 बार चूमते थे...अजीब दुनिया थी किताबों की...आपको किताबों की अलग सी दुनिया की स
 
विवेक आसरी
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गुलामगिरी: एक बेहद जरूरी किताब

शेष नारायण सिंह महात्मा गांधी की किताब हिंद स्वराज की शताब्दी के वर्ष में कई स्तरों पर उस किताब की चर्चा हो रही है, जो जायज भी है। महात्मा जी की इसी किताब ने सत्याग्रह और अहिंसा को राजनीतिक विजय के एक हथियार के रूप में विकसित करने की प्रेरणा दी और 19
 
दिलीप मंडल