पसंद करें
3
नापसंद करें

आसान नहीं होता, होना.. लेखक..

तुम्हारे लिए तो पैरिस ‘अ मूवेबल फीस्ट’ नहीं होगा, फिर फटेहाल क्यों घूमते होगे, ढूंढ़ते क्या लंदन में, लेखक? सैंतालीस साल के संक्षिप्त जीवन में जीवन से कैसा जी लगाया होगा, भाषा को सर के बल खड़ा करके बस इतनी ज़रा उम्र, अपनों की ही नहीं, स्पेन के सपनों की
 
Pramod Singh
पसंद करें
0
नापसंद करें

कहां-कहां गुज़र गया..

शंघाई में अमरीका, शिकागो में चीनी..
 
Pramod Singh
पसंद करें
0
नापसंद करें

वागानोव की व्‍यथा और अन्‍य किस्‍से..

कुछ लोग अपनी किस्‍मत में जाने कैसे हीरे की हंसी और पत्‍थर के आंसू लिए आते हैं, कि पत्‍थरदिल दुश्‍वारियों में हो सकता है आंखों में एक गहरी उदासी घर जाये, मिजाज का सेंस ऑफ़ ह्यूमर कभी बेदम नहीं होता. बहुत वर्ष हुए विश्‍वविद्यालयी दिनों में करीबन डेढ़ सौ
 
Pramod Singh
पसंद करें
0
नापसंद करें

कितना कही कह गई जो नज़र..

क्‍या कहता है एक लेखक का चेहरा? बता पाता सुलझा जाता है क्‍या देखा होगा इन अलसायी आंखों ने, जिया होगा गाल के हाथ और बोतल के साथ ने? कैसे-कैसे शब्‍द .. कहां-कहां से चले आए होंगे? अभी, बिलकुल अभी आने, आनेवाले भी होंगे ..
 
Pramod Singh
पसंद करें
3
नापसंद करें

पुरानी, बिगड़ी आदतें..

अपनी छुटपन वाली उम्र में (इससे यह मतलब कतई न निकाला जाये कि अब बड़प्‍पन वाले में दाखिला ले लिये हैं!) हम ' स्‍क्रीन ' और ' पिक्‍चर-पोस्‍ट ' से काट-काटकर फ़ि‍ल्‍मी कतरनें बटोरा करते थे (मैं बच्‍चादार बाप नहीं, सोचकर सशोपंज में हूं पता नहीं छुटपन वाली
 
Pramod Singh