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नदिया डूबी जाए
नदिया डूबी जाए -आचार्य परशुराम राय किस अचेतन की तली से चेतना ने बाँग दी कि काल का घेरा कहीं से टूटने को आ गया है। नियति को देती चुनौती विद्रोह करती वेदना, आदिम इच्छा के मात्र एक फल चख लेने की काट रही सजा, सृजन के कारागार से अब बाहर निकल कर आ गई
May 04 2010 06:47 PM



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