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तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..

मौसम के साथ चलिये कि लड़ना फ़िज़ूल हैतब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..इंसां नहीं कोई भी मुकम्मल जहान मेंलेकिन नज़र में और की खामी है भूल है तारीख में मिलेंगे न उनके निशान तक....जिनको न साथ वक्त के चलना कबूल है.....कश्ती का नाखुदा भी हुआ कितना बदगुमानखुद
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हमें तुम भूल भी जाओ ....

हमें तुम भूल भी जाओतुम्हे हम प्यार करेंगेगवारा जो न हो तुमकोनहीं इज़हार करेंगेजो ख़्वाबों में चले आएतो नज़रे तुम चुरा लेनाजो तनहाई में तड़पाएतो यादों से मिटा देनाबना दो गैर ही हमकोनहीं तकरार करेंगेहमें तुम भूल भी जाओतुम्हे हम प्यार करेंगेवफ़ा न तुम करो
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आया अलबेला त्यौहार रंगीला होली का [होली गीत]

आया अलबेला त्यौहार रंगीला होली कागोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली कालपट झपट कर निकली घर सेमुख घूँघट पट में छुपाएलाख जतन कर प्रियतम खोजेप्रिया को ढूंढ़ ना पाएअल्हड़ नाद उठे मस्तो की टोली कागोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली काआज तो मन का मेल मिटासब लोग गले
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ना आए विरह की रैन

दो नयना मिल दो से चार हुए, ना सूझे कोई औरजो तुम सुध आकर लो मेरी, मैं यह दुनिया दू छोड़ धरती मचले प्यास से, बादल का ना कोई निशानचंचल मन हुआ बावरा, तुम बिन देह हुई निष्प्राण कोयल कूहके बाग में, पपीहे ने मचाया शोरऋतु पर भी यौवन चड़ा, पर ना नाचे मन का मोर
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अपना खून (कहानी)

शाम ढलने को है... मीनाक्षी का दिल बैठा जारहा है । शोभना .....भाभी आप फीक्र ना करो रिपोर्ट ठीक ही आएगी । मीनाक्षी .....जैसे तुम कह रही हो वही होगा, ना जाने क्या कहा होगा मूए डाक्टर ने । इतने में ही सुधीर आ पहुचता है मुरझाया चहरा कापते हाथो से रिपोर्ट
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आलम-ए-इश्क (ग़ज़ल)

तुमसे मिली है नज़रे जब से, मैं तो दिवानी हो गईबस इक तुम हो अब अपनों में,सारी दुनिया बेगानी हो गईइश्क में जो आहें भरते है, हम अक्सर उन पर हसते थेतेरे इश्क में अपनी भी, उनके ही जैसी कहानी हो गईबिन तेरे हर इक मंज़र मुझको, सूना सूना लगता हैतनहाई और बेचैनी ही,