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इंसान सस्ता हो रहा है-क्षणिकायें

महंगाई आसमान पर चढ़ गयी है, इसलिये नैतिकता तस्वीर में जड़ गयी है। चीजों की तरह इंसान भी बिकने लगा है, मांग आपूर्ति के नियम से अनुसार जरूरत से ज्यादा है बाज़ार में इसलिये मेहनत की कीमत पड़ रही है। ——— आधुनिकता के नाम पर इंसान सस्ता हो रहा
 
दीपक भारतदीप
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बस इतना सा ज़र्फ़ मुझे देना दाता !

जीवन के झंझावातों से क्या डरनापथ में बाधाओं की चिन्ता क्या करनासंकट के भुजपाश मिलें तो रोना क्योंमुश्किल हो यदि लक्ष्य तो साहस खोना क्योंक्षण भर भी न रहूँ व्यर्थ की बातों मेंहिम्मत की पतवार थाम लूँ हाथों मेंलेकर प्रभु का नाम, राह पर डटी रहूँमन में रख
 
RUCHIPRIYA ON LINE
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माँ, सॉफ्टी, अपने और ''मामा जी'' का बचपन

माँमाँ की ऑचल से प्‍यार बरसता है,ममता बिन जीवन अधूरा लगता है।जब उनके हाथो की रोटी मिलती है,तो सारे संसार का ''वैभव'' छोटा लगता है।।सॉफ्टीतेरे सॉफ्टी को देख कर,मुझे भी खाने का मन कर रहा है।उफ ये क्‍या तू वहाँ हाफ टी-शर्ट मे,और मै यहाँ स्‍वेटर मे घूम रहा
 
महाशक्ति
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लघुइका

तुम प्‍यार हमे करते हो,पर कॉल क्‍यो नही करते हो।जब बैलेंस की चिन्‍ता करते हो,तो क्‍या खाक प्‍यार हमे करते हो।।
 
महाशक्ति
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ग़ज़ल

ईमान की इक लाश की कर रहे थे तुम फ़िकर देखो, यहां लाशों का बस रहा है इक शहर देखो। लगी थी आग जो शोलों का अब असर देखो, किसी ने ढा दिया है हम पे ये कहर देखो। जुबां पे बन्दिश का जमाना गया गुजर देखो, मीठी बातों का मिल रहा है अब जहर देखो। कहा था तुमने मुहैय्
 
creativekona
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कविता - गीत

तू माने या न माने , मैं तेरा हूँ तू मेरी है तू कविता है या प्रेमिका , तुझे कागज़ पे लिख लूँ मैं । तेरी बातों की मिश्री से , मुंह मीठा कर लूँ मैं तेरी यादों की खुशबू से , दामन अपना भर लूँ मैं । तू कविता है ..... तेरे सपनों के दर्पण से , अक्स अपना देखूं
 
मनोज
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3. वोट न देबो नेताजी !

कवि - उमेश प्रसाद 'उदय' रोज नया मुद्दा अपना के गली-गली में टहलऽ हऽ ! वोट न देबो नेताजी, नित-दिन दल तूँ बदलऽ हऽ ! गोली, बम, बारूद ढेर के ढेरे हम जुटइली हल । बूथ-बूथ पर पुलिस भाई से लाठी भी हम खइली हल । विधान सभा आउ संसद में बइठल रसगुल्ला छीलऽ हऽ । वोट
 
नारायण प्रसाद
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उन दिनों...

उन दिनों... हम-तुम कितने खुश थे, छोटी-छोटी बातों पर हंसते , बिन बातों के ही रूठते, तुम हंसके के मुझे मनाती और मैं हंसके तुम्हें जलाता था, उन दिनों... दिल धड़कता था एक साथ , नहीं होती थी जब तुमसे मुलाकात, तब लगता कि, अब आ भी जाओ एक पल को मेरे पास, उन
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