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इंसान सस्ता हो रहा है-क्षणिकायें
महंगाई आसमान पर चढ़ गयी है, इसलिये नैतिकता तस्वीर में जड़ गयी है। चीजों की तरह इंसान भी बिकने लगा है, मांग आपूर्ति के नियम से अनुसार जरूरत से ज्यादा है बाज़ार में इसलिये मेहनत की कीमत पड़ रही है। ——— आधुनिकता के नाम पर इंसान सस्ता हो रहा
May 15 2010 11:18 AM



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