आयम स्टिल वेटिंग फॉर यू, शची (समापन किस्त )
शची के यहाँ से निकला....निरुद्देश्य सा इधर उधर भटकता रहा थोड़ी,देर...कुछ लोगों से बातें की...मन में भले ही झंझावात चल रहें हों..पर प्रोफेशनल ड्यूटी तो निभानी ही है...जिस काम के लिए आया है,उसे तो अंजाम देना ही है.....भले ही दिल के अंदर अरमानों
May 13 2010 09:44 PM



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