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पोर्नोग्राफी , कम्प्यूटर और औरत

       सामान्यत: पोर्न फिल्मों अथवा फिल्म में गैर-परंपरागत सेक्स के दृश्य रहते हैं। गैर-परंपरागत सेक्स की कोटि में मुख मैथुन, गुदा मैथुन,समूह मैथुन, मैथुन के वे रूप जो सामान्य मैथुन से भिन्न हैं और जिसमें शरीर को काफी कसरत करनी
 
jagadishwar chaturvedi
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‘मीडिया और स्त्री’ [संदर्भ - ‘12/24 करोलबाग’ धारावाहिक (ZEE TV)]

‘मीडिया और स्त्री’ [संदर्भ - ‘12/24 करोलबाग’ धारावाहिक (ZEE TV)] ‘12/24 करोलबाग’ ZEE TV का एक बेहद लोकप्रिय नायिकावादी धारावाहिक है। इस धारावाहिक के कथानक का आधार करोलबाग में रहने वाला एक मध्यवर्गीय परिवार है जिसे ‘सेठी परिवार’ के नाम से जाना जाता है। इस
 
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स्त्री शरीर और प्रेम का साहित्यिक पहाड़ा

  स्त्री का शरीर न होता तो काव्य कैसा होता ? प्रेम कैसा होता ? क्या पुरुष स्त्री से प्रेम करता ?समाज कैसा होता ? वैषम्य की सारी जंग स्त्री शरीर या शरीर पर वर्चस्व बनाए रखने के साथ जुड़ी है। पितृसत्ता का सारा वैचारिक दांव स्त्री शरीर पर ही लगा
 
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी
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भारतीय साहि‍त्‍य में कामुकता वि‍मर्श

साहित्य में एक दौर ऐसा भी आया था जब कहा गया कि   'प्रत्येक बात को कहने दो', इस नारे के तहत सेक्स के संदर्भ में जितने भी विवरण थे, सबको खुलकर बता दिया गया। यह कार्य लंबे समय से श्रृंगार - साहित्य और रीतिवादी साहित्य करता रहा है। सेक्स का वर्णन अब
 
jagadishwar chaturvedi
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कामुकता और भारतीय दमि‍तबोध

सवाल उठता है सेक्स को लंबे समय से पाप क्यों कहा गया , जबकि हम यह जान गए थे कि उसका निर्माण किन तत्वों के जरिए हुआ था।   उसका   किनसे संबंध है। फूको कहता है कि सेक्स को जल्दबाजी और संक्षेप में निन्दा करते हुए पेश न किया जाए।बल्कि हमें सवाल क
 
jagadishwar chaturvedi
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भारतीय रैनेसां और सेक्‍स

सवाल उठता है भारत   में 19 वीं शताब्दी में वेश्‍याएं सबसे ज्यादा किस शहर में दर्ज की गईं  ?     वे कौन लोग थे जो वेश्‍याओं के कोठों पर जाते थे  ?     रैनेसां के समय कलकत्ता में जब कामुकता की नयी आधुनिक आचार - स
 
jagadishwar chaturvedi
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सेक्‍स के प्रति‍ आधुनि‍क नजरि‍या

फूको का मानना है कि 'सेक्स' हमारा जीवन सत्य है। यह आधुनिक सभ्यता की आत्म - स्वीकृति का बुनियादी सिध्दान्त है। अन्तोनी गिदेन का मानना है कि आधुनिक विचारों को ऊर्जस्वित करने में मुश्किल से इससें कोई मदद मिलती है। एक अन्य विचार यह है कि सेक्स एक तरह से
 
jagadishwar chaturvedi
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छद्म मर्दानगी है समलैंगि‍कता

जब आप संस्कृति पैदा करते हैं तो वह सीधे अस्मिता को चुनौती देती है। यही वजह है कि समलैंगिक अपनी पहचान को उभारने की कोशिश करते हैं। पहचान को बनाने की कोशिश करते हैं। फूको इस बात से बहुत चिन्तित है कि इस संस्कृति को कोई व्यक्ति की आत्मा की मुक्ति के साथ
 
jagadishwar chaturvedi
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कामुकता का वि‍लायती तर्कशास्‍त्र

मिशेल फूको  ने ' दि हिस्ट्री ऑफ सेक्सुअलिटी ' के तीसरे खण्ड 'दि केयर ऑफ दि सेल्फ' के पहले भाग में ''ड्रीमिंग ऑफ अन प्लेजर'' में आर्मिताज की रचना के संदर्भ में जो सवाल उठाते हैं,वे काफी हद तक कामसूत्र की धारणाओं से मेल खाते हैं। आर्मिताज की कृति
 
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कामसूत्र में कामुकता के नि‍यमों का खेल

आनंद में जब अविश्वास पैदा हो जाता है तो उसका सीधा असर शरीर और आत्मा पर पड़ता है।साथ ही वैवाहिक जीवन में कामुक सुख और वैवाहिक दायित्वों पर भी असर पड़ता है। कामसूत्र में कामुकता संबंधी चिन्ताओं और समस्याओं पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना कामुक आनंद प
 
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सेक्‍स के प्रति‍ 'कामसूत्र' का नजरि‍या

सेक्स भारतीय भारतीय चिन्तन में सिर्फ शारीरिक क्रिया नहीं है। बल्कि कला रूप भी है। भारतीय समाज में एक स्कूल ऐसा भी था जिसका सेक्स के प्रति भौतिकवादी रवैयया रहा है। सेक्स को संस्कृति के साथ जोड़कर देखा गया है। संस्कृत साहित्य में कामुक इमेजों का सांस्क
 
jagadishwar chaturvedi
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कामशास्त्र की भारतीय परंपरा में सेक्‍स

कामसूत्र की उत्पत्ति की शास्त्रकथा बड़ी रोचक है। इस कथा का भी यदि देरीदियन मूल्यांकन किया जाए तो अनेक नए पक्षों पर रोशनी पड़ती है। पहली बात यह निकलती है कि कामशास्त्र , अर्थशास्त्र और आचार शास्त्र का हिस्सा है। आरंभ में ब्रह्मा ने एक लाख अध्यायों का
 
jagadishwar chaturvedi