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अब आगे क्या होगा पता नहीं ?

एक बार मुझे अपने घर के रास्ते में एक कांटा चुभा । जूता छेद कर अन्दर तक चला गया । बहुत दर्द हुआ; बड़ा, लम्बा-मोटा था । मैंने निकाला और किनारे फैंक दिया फिर भूल गया । एक दो दिन तक हलकी पीड़ा रही; उसके बाद तो बिलकुल भी याद न रहा । कुछ दिन बाद मेरे बेटे ने
 
शंकर फुलारा
टैग: कांटे
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