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आईये फ़िर कव्वालीमय हो जायें....!!!

बस, आंख बन्द करें और गुम हो जायें...सखी बाली उमरिया थी मोरी,मोरे चिश्ती बलम चोरी चोरी,लूटी रे मोरे मन की नगरिया....
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प्रीतम का कुछ दोष नहीं है

आज आप सुनिये मेरे पसन्दीदा भक्ति संगीत कलैक्शन में से एक भजन  (आप इसे नात या कव्वाली भी कह सकते हैं) "सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम" प्रेमरस से सराबोर इस रचना के गायक शायद सुप्रसिद्ध श्री नुसरत फतेह अली खान जी हैं।Subscribe Free for future
 
अन्तर सोहिल
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बात अब तक बनी हुई है

धन्यवाद, शुक्रिया, मेहरबानी, आभार उस परमपिता, परमात्मा, अल्लाह, रब, भगवान, परमसत्ता को Subscribe Free for future posts    Add this player to my Page
 
अन्तर सोहिल
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आरजुओं का सारा जहां लुट गया

आज किसी दोस्त किसी बिछडे दोस्त को याद कर लिया जाये। ठंडी छांव की ही नही कभी-कभी कडी धूप भी जरूरी होती है। कभी-कभी उदास भी हो लिया जाये। आज सुनिये एक दर्दीली आवाज में कव्वाली । उम्मीद है आपको यह कलाम पसन्द आयेगा। इन हसीनों के चेहरे तो मासूम हैं किसको
 
अन्तर सोहिल
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दिल तो क्या चीज़ है जान से जाएँगे- नुसरत

ऐसा बनना सवारना मुबारक तुम्हें, कम से कम इतना कहना हमारा करो, चाँद शरमाएगा चांदनी रात में, यूँ न जुल्फों को अपनी संवारा करो । यह तबस्सुम यह आरिज़ यह रोशन जबीं, यह अदा यह निगाहें यह जुल्फें हसीं , आइने की नज़र लग न जाए कहीं, जान-ऐ-जान अपना सदका उतरा कर