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किसिम किसिम की गुलाल................................

किसिम-किसिम की गुलाल लेकर,  हम उड़ चले थे उन्हें लगाने  !मगर वहाँ से वो उड़ चले थे, तमाम रंगत को ही मिटाने !!तभी  यकायक से मौसमे-गुल, ने हक़ में अपने जो दी गवाही !तो हैरत-अँगेज़ रँगे-जन्नत, लगे हमारी ग़ज़ल सजाने !!आप