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कर्ज़दार---2

कर्ज़दारपिछली कडी मे आपने पढा कि प्रभात की माँ ने अपने पति की मौत के बाद कितने कष्ट उठा कर बच्चों को पढाया प्रभात की शादी मीरा से होने के बाद प्रभात ने सोचा कि अब माँ के कन्धे से जिम्मेदारियों का बोझ उतारना चाहिये। इस लिये उसने अपनी पत्नि को घर चलाने के
 
निर्मला कपिला
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माही बह रही थी

माही नदी के पानी पर ढाक के पेड़ों की सुनहरी काली छाया ,  चांदी का वरक लपेटे बहता प्रवाह और किनारे की बजरी पर उगी नरम घास अनारो के कबीलाई मन के संस्कार बन चुके थे. उसका बचपन यहीं रेत में लोट-लोटकर उजला हुआ था. घंटों नदी के पानी में पैर डालकर बैठी
 
Aparna Manoj Bhatnagar
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karzdar

जब तक नया कुछ लिख नही पाती तब तक अपनी पुस्तक मे से कहानियां  ही पोस्ट कर रही हूँ। ये कहानी मेरी पुस्तक  वीर्बहुटी मे से है और दैनिक जागरण समाचार पत्र मे भी छप चुकी है।कर्ज़दार--कहानी"माँ मैने तुम्हारे साम्राज्य पर किसी का भी अधिकार नही होने दिया
 
निर्मला कपिला
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नीरा जाग गयी है....

आज फिर घर में बड़ी चहल-पहल थी. पूरा सामान उलट-पुलट किया जा रहा था. पापा व्यस्त थे. माँ व्यस्त थीं. छोटी बहनें चहक रहीं थीं, बस नीरा चुप थी. देख रही थी चुपचाप . किसी ने कोई काम बताया तो कर दिया, बस इतना ही. सबके चेहरों पर ख़ुशी थी , लेकिन नीरा का चेहरा
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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एक दिन सुबह

अपनी नौकरी से रिटायर होने के बाद एक एकदम नये और अंजाने शहर में बसने का फैसला मेरा ही था। फैसलों में किसी की राय लेना और फैसला में उन राय-मशवरों की भूमिका में बहुत फर्क होता है। मैं नहीं चाहता था कि मेरी नौकरी और नौकरी से जुड़ी चीजे मुझे बाद के जीवन में
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नेता जी की नरक यात्रा ...................

एक भ्रष्ट नेता जी, (ईमानदार  नेता के साथ भगवान् ऐसा कभी ना करे) की कार दुर्घटना  में मृत्यु हो गई ! ( ऐसा अक्सर होता नहीं है ) मृत्यु के बाद उनकी आत्मा को यमराज  एक बड़ी सी लिफ्ट में यमलोक लेकर पहुंचे ! आखिर वीआईपी जो ठहरे,
 
soni garg
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एक झूठ

कहानियों के लिये सामग्री हमें आसपास की जीवन से मिल जाती है। पात्रों के जीवन में झॉंक कर और कुछ कल्पलना के रंग भर कर कहानी बन ही जाती है। सावधानी यह बरतनी पड़ती है कि पात्र या घटनायें बहुत करीब की न हों। बच्चे क्या सोचेंगे, भाई साहब कहीं बुरा न मान जायँ
 
मथुरा कलौनी
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गुङ और चींटी

मैं अपने घर में चींटियों से परेशान था.खाने पीने का सामान तो दूर मेरे कपङे,बिस्तरे और सोफ़ा सेट भी उससे अछुता नहीं था.वैसे चींटियां भी मुझसे परेशान हो चुकी थी. एक दिन मुझसे उनकी हालत देखी नही गयी और मुझे उनपे तरस आ गया.मैंने सोचा यदि थोङा सा गुङ लाकर रख
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पश्चाताप :मानस खत्री

एक लड़की थी. उसका नाम था डिंकी. वो अपने माता-पिता की एकलौती संतान थी. दोनों ही उससे बहुत प्यार करते थे. डिंकी पढने के साथ-साथ विद्यालय की सारी गतिविधियों में सबसे आगे रहती थी. परन्तु उसमें एक कमी थी. वो घर में कोइ काम नहीं करती थी. जब भी उसकी माँ उससे
 
Manas Khatri
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आर के भारद्वाज की कहानी : केयर टेकर

  प्रातः कालीन भ्रमण मेरा शौक है, सुबह की हवाखोरी से मुझे दिन भर ताजगी, स्‍फूर्ति मिल जाती है, सुबह के दौरान मैं कई अपने जैसे लोगों को भी देखता हूं। कोई दौड़ लगा रहा होता, तो कुछ अपने झुण्‍ड के साथ राजनैतिक चर्चा करते हैं, प्रायः महिलायें तो विगत
 
Raviratlami
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सबसे मीठा क्या :मानस खत्री

एक गुरु के पाँच शिष्य थे. गुरु जी उन्हें अपने आश्रम में शिक्षा प्रदान करते थे. एक दिन गुरूजी ने शिष्यों से कहा, "जो मेरी परीक्षा में सफल होगा, उसे ही अपना योग्य शिष्य बनाऊंगा". पाँचो शिष्यों ने कहा, "गुरूजी आप हमारी परीक्षा ले सकते हैं". गुरूजी ने एक दिन
 
Manas Khatri
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किसान की बेटी

बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में एक किसान रहता था। उस किसान की एक जवान बेटी थी। उसकी नाम था– रूपा। रूपा बहुत ही सुंदर लड़की थी। वह मेहनती भी बहुत थी। वह खेत में अपने पिता के साथ काम करती और घर में माँ के साथ। उसके लिए आराम हराम था। वह सारा दिन किसी न
 
किरण गुप्ता
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किसकी थी वो भूल :मानस खत्री

श्यामपुर के जंगल में कई जानवर रहते थे. इन्ही जानवरों में सेवु नाम का चील, कीकड़ नाम का बगुला और स्वेतु नाम का सर्प भी रहते थे. इन तीनों में बड़ी गहरी मित्रता थी. ये तीनों हर काम मिल-जुल कर करते थे. कीकड़ स्वेतु से बहुत इर्ष्या करता था, क्योंकि स्वेतु
 
Manas Khatri
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किसकी थी वो भूल :मानस खत्री

श्यामपुर के जंगल में कई जानवर रहते थे. इन्ही जानवरों में सेवु नाम का चील, कीकड़ नाम का बगुला और स्वेतु नाम का सर्प भी रहते थे. इन तीनों में बड़ी गहरी मित्रता थी. ये तीनों हर काम मिल-जुल कर करते थे. कीकड़ स्वेतु से बहुत इर्ष्या करता था, क्योंकि स्वेतु
 
Manas Khatri
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“वो पुरानी खिड़की”-2

अब आगे........कहते हैं कि वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता, और उसके लिए वक्त बदल भी गया। मेरे लिए तो वक्त अभी था पर उसका वक्त भी तो मेरा हो चुका था जो मुझसे मेरी ही चुगली कर रहा था और बता रहा था मुझे कि अब मेरे पास भी वक्त नहीं रह गया है। मेरे वक्त ने तो कसम
 
Nitish Raj
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“वो पुरानी खिड़की”-1

अब आगे.........जेठ के महीने की चिलचिलाती धूप में भी वो हौसला दिखाते हुए मुझसे मिलने पहुंच ही जाती थी मेरे तपते हुए कमरे में। उसके पत्थर फेंकने पर मैं धीरे से बिना आवाज़ किए सीढ़ी नीचे उतार देता और फिर हम दोनों घंटों बैठकर बातें करते रहते थे। कभी इतिहास
 
Nitish Raj
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“वो पुरानी खिड़की”

‘वो’ खिड़की, मेरी खिड़की, जो कुछ पुराने जमाने की थी, वहां से सड़क दूर तक दिखती। कोई भी दूर से आता आसानी से खिड़की की सलाखों के बीच से पहचाना जाता। पूरी सड़क दिखा करती थी, हमारा घर या यूं कहें कि ‘उस’ दुमंजले वाली खिड़की सड़क के साथ-साथ थोड़ी सी कर्व में
 
Nitish Raj
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झूम उठी बालों की देवी / सारा जोसेफ़ / अनु. चेन्नीत्तला कृष्णन नायर

[ अज़दक की पोस्ट पढ़ते हुए मेरी साथी डॉ. स्वाति को मशहूर मलयालम कथाकार (केन्द्रीय साहित्य अकादमी विजेता) सारा जोसेफ़ की कहानी झूम उठी बालों की देवी बरबस याद आ गई । इस कहानी का हिन्दी अनुवाद चेन्नीत्तला कृ्ष्णन नायर ने किया है । सारा जोसेफ़ का सम्पर्क पता -
 
Aflatoon अफ़लातून
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स्पेस-.............. कहानी.................मानोशी जी

एक प्रवासी लेखकों की किताब के लिये, कहानी लिखने का हुक्म पूरा करने ये कहानी लिखी गई। प्रवास की सॆटिंग में लिखी कहानी-स्पेस"बड़े दुख से गुज़री हो तुम, है न? सच बड़ा कठिन समय रहा होगा"। उसे नहीं चाहिये थी सहानुभूति। साइको थेरैपी के लिये कई जगह जा चुकी थी वो।
 
हिन्दी साहित्य मंच
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..........नाम में कुछ नहीं ...........................

आज सुनिए एक और पुरानी कहानी ....................शीर्षक है........................ " नाम में कुछ नहीं " Get this widget | Track details | eSnips Social DNA
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ढीली गाँठ ...... - स्वर कथा

तेंदू पत्ते के जंगलों से आच्छादित और पत्थरों के रूप में अनमोल खजाने से परिपूर्ण मध्यप्रदेश की आदिवासी बाहुल्य भूमि बस्तर ... प्रायः नक्सल समस्या के लिए अख़बारों की सुर्खियों में रहा यह क्षेत्र आदिवासी और जनजातियों की निश्छल संस्कृति और सभ्यता की धरोहर को
 
श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’
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प्रमोद भार्गव की कहानी : मुक्त होती औरत

यह जो आप पढ़ रहे हैं, दरअसल यह कहानी का अंश नहीं है। बतौर पृष्ठभूमि कहानी का सार भी नहीं है। यह केवल उस वातावरण का उद्घाटन मात्र है, जो इस कहानी के पात्रों की मानसिकता को प्रभावित करता है और उसी अनुरूप पात्रों के चरित्र ढलकर घटनाओं, प्रतिघटनाओं को अंजाम
 
Raviratlami
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दोनो में कौन बडा ?????

आज सुनिए एक पुरानी कहानी......................................... Get this widget | Track details | eSnips Social DNA
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लोमङी की चतुराई

जंगल में प्रजातंत्र हो जाने के बाद राजा शेर भी ब्लोगिंग करने लगा.जंगल में ही एक गीदङ अपनी पत्नी लोमङी के साथ रहता था.गीदङ और लोमङी भी ब्लोगिंग करते थे.लोमङी किसी तरह शेर को नींचा दिखाना चाहती थी.वह अक्सर गीदङ से कहा करती थी कि शेर उस पर बुरी नजर रखता है.
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कहानी- वह चली गई तो..

घर के तीनों कमरे में बारी-बारी से जाकर वे फिर से अपने पढने की मेज-कुर्सी पर लौट आए। उनके चेहरे पर झल्लाहट साफ नजर आ रही थी। छत पर पंखा मद्धम गति से घूम रहा था। उन्होंने अपनी गर्दन उठाकर एक उचटती निगाह उस पर डाली और मेज पर औंधी रखी किताब को पलटकर फिर से
 
रतन चंद रत्नेश
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15. बैल के दूध

कहानीकार - राम बुझावन सिंहटिफिन होला पर सब शिक्षक अध्यक्ष के कमरा में हमेशा के तरह जुट गेलन आउ झिंगुर साव हलुआई हीं से दालमोट, सिंघाड़ा आउ बिस्कुट मँगा लेवल गेल । ऊ दिन नाश्ता के बाद जब चाय ढारल गेल, त ऊ बिलकुल काढ़ के रंग लगल । अध्यक्ष जी झिंगुर साव के
 
नारायण प्रसाद
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यू.के. से प्राण शर्मा की कहानी – तीन लँगोटिया यार

तीन लँगोटिया यार - प्राण शर्मा राजेंद्र ,राहुल और राकेश लँगोटिया यार हैं. तीनों के नाम ” र ” अक्षर से शुरू होते हैं. ज़ाहिर है कि उनकी राशि तुला है. कहते हैं कि जिन लोगों की राशि एक होती है उनमें बहुत समानताएँ पायी जाती हैं. राजेंद्र,राहुल और
 
महावीर
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एक घर की कहानी ऐसी भी

सुमन दमकते सूरज को देखती तो कभी कार के खराब ऐ.सी को कोसती....आज कई दिनों बाद निकले सूरज देवता जैसे अपनी मौजूदगी का एहसास कराने की ठान कर उदय हुए थे...पिछले हफ्ते हल्की फुल्की फुहार से मिली शांति आज न जाने कहाँ काफ़ूर हो गई थी.... अम्माजी के लिए आँखों की
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.व्यंगात्मक कहानी

" गरीबी एक अभिशाप है किंतु इससे विचलित होकर जो लोग गलत राह चुन लेते हैं , वे खुद को बर्बादी की ओर बढाते हैं और जो धैर्य रखकर संतोष व ईमानदारी अपनाए रखते हैं वे अपना उत्थान करते हैं " सुनिए मेरी आवाज में आवाज पर ...............सुदर्शन जी की व्यंगात्मक
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" हवा उद्दंड है........"

( अपने वरिष्ठ जनों के आदेश और इच्छा का सम्मान करते हुए, इस कहानी का पुनर्प्रकाशन कर रही हूं. मेरे जिन साथियों ने इसे पूर्व में पढा है, उनसे क्षमा-याचना सहित-_"अन्नू..... उठ जाओ, छह बज गए हैं।"मम्मी की आवाज़ के साथ ही मेरी आँखें खुल गई थीं। क्या मुसीबत
 
वन्दना अवस्थी दुबे
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जंगल में नक्सलवाद

जंगल में नक्सलवाद की समस्या से शेर चिंतित था.नक्सलवादी सांपों ने सत्ता के विरुद्ध बिगुल फ़ूंक दिया था.वस्तु-स्थिति से अवगत होने के लिये गृह-मंत्री हाथी को बुलाया गया.हाथी ने कहा-" महोदय, ये सांप विकास के विरोधी हैं.ये सत्ता पर अधिकार करना चाहते
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अरुणा कपूर की कहानी : मोहिनी समाई सागर में...

मोहिनी! ....पिछ्ले महीने ही मेरे पड़ोस के मकान में रहने आ गई है!...नाम भले ही मोहिनी है; उसे सुंदर नहीं कहा जा सकता!... सांवला रंग, मझौला कद, चेहरे पर हर घडी तनाव की रेखाएं खिची हुई.... उम्र कोई 50 से 55 के बीच की ही होगी!... हां! जब कभी ' वन्स इन ए ब्लू
 
Raviratlami
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आर. के. भारद्वाज की कहानी – सः मम प्रिय

वयोवृद्ध चुनाव आयोग ने चुनावी शंखनाद किया, शंखनाद के उपरान्‍त विभिन्‍न राजनैतिक दलों ने भी अपनी अपनी सामर्थ्‍य के अनुसार शंखनाद किया, कुछ कमल लेकर, कुछ साइकल पर, कुछ हाथ का पंजा, कुछ लालटेन, कुछ हाथी पर, कुछ दराँती हसिया आदि विभिन्‍न अस्‍त्र शस्‍त्र
 
Raviratlami
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हरि भटनागर की कहानी : आँख का नाम रोटी

अनिल जनविजय के लिए बाहर कोई बच्‍चा रो रहा है। रोने की आवाज़ ऐसी कि लगता, बच्‍चा किसी तकलीफ़ में है चोट लगी है या कोई दूसरी पीड़ा है। मैं अपने काम में लगा हूँ। आम काटने में। पिछले साल किसी झंझट की वजह से अचार नहीं डल पाया था। पत्‍नी कहती रह गई थीं लेकिन
 
Raviratlami
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हरि भटनागर की कहानी : बदबू

आपके लिए यह घटना गैरज़रूरी, कान न देने वाली, हो सकती है, लेकिन मेरे लिए इसकी अहमियत है। यही वजह है कि मैं इससे बेचैन हूँ और इसके तले मेरा दम घुटा जा रहा है। इस घटना के बारे में सोचता हूँ जो मेरे साथ घटी, तो समझ में आता है कि इसका संबंध उस बदबू से था जो
 
Raviratlami
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हरि भटनागर की कहानी : बला

पाल का दिमाग़ बुरी तरह पलझाया हुआ है। पलझाया इसलिए कि दस-पन्‍द्रह दिनों से धंधा पूरी तरह चौपट है। एक तो भयंकर गर्मी और जानलेवा उमस कि लोग मजबूरी में घर से निकलते, दूसरे मंदिर-निर्माण को लेकर शहर में जुलूसों का रेला है। प्रशासन ने शहर के तमाम रास्‍ते ज़ाम
 
Raviratlami
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राकेश भ्रमर की कहानी - चिन्दी

चिन्‍दी फिर ससुराल से भागकर मायके आ गई थी. यह तीसरी बार हुआ था. ब्‍याह हुए अभी चार ही महीने हुए थे. चार महीने में वह चार हफ्‍ते भी ससुराल में न टिकी होगी. ब्‍याह के चार दिन बाद बिदा हो के मायके आई थी, तो पन्‍द्रह दिन बाद ससुराल गई थी. लेकिन वहां दुबारा
 
Raviratlami
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कहानी ''कौन सी ज़मीन अपनी''

साहित्यिक पत्रिका ''समय के साखी'' में मेरी कहानी ''कौन सी ज़मीन अपनी'' छपी है... कहानियों में पृष्ट १४४ पर देखें.. लिंक है -- http://www.samaykesakhi.in/kahani/143.html
 
Shabdsudha
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प्रमोद भार्गव की कहानी : गंगा बटाईदार

अजीब पशोपेश में है गंगा बटाईदार ! गंगा बटाईदार कुछ बरस पहले तक अटलपुर का सबसे नामी-गिरामी बटाईदार हुआ करता था। हांलाकि उसका पूरा नाम गंगाराम था, पर बटाईदारी खानदानी पेशा होने के कारण अनायास ही उसका नामाकरण हो गया गंगा बटाईदार ! यही नाम जनप्रिय होकर चलन
 
Raviratlami
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प्रमोद भार्गव की कहानी : मुखबिर

दोहरी चाल चल रहे गंगाराम गड़रिया को पूरी रात ठीक से नींद नहीं आई। वह करवटें बदलता रहा। वह बार-बार सूख-सूख जाते गले को लोटा भर पानी गढ़ककर तर करने का उपक्रम करता रहा। पर बार-बार मुताश आ जाने से उसे मोरी पर जाकर मूतना पड़ता और उसे फिर से शरीर में जल अभाव
 
Raviratlami
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