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कविता-हवा का रुख
पिछले कुछ दिनों से उलझा हुआ सा था। वैशाली में एक मकान खरीदा है, उसे घर का रुप देने की तैयारी में हूं। रंगाई-पुताई सब है।आज मेरे बेहद करीबी मित्र और साथी रचनाकार सारथी ने टोचन दिया कि तुमने लिखना ही छोड़ दिया। तो भान हुआ कि अरे हम अपने मंदिर ब्लॉग पर तो
Jun 17 2010 12:31 AM



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