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कविता--व्यंग महिला दिवस

दो दिन दिल्ली गयी थी इस लिये किसी ब्लाग पर नही आ सकी और न ही कुछ नया लिख सकी। फिर भी महिला दिवस हो तो सोचा कुछ तो लिखना ही चाहिये। इस लिये एक पुरानी कविता ठेळ रही हूँ। कल दिल्ली मे रंजू भाटिया जी और बेटे प्रकाश सिंह अर्श से मिली बहुत अच्छा लगा। मिलना तो
 
निर्मला कपिला
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Veer Bahuti

मैं नेता बनूंगा [व्यंग ] एक दिन बेटे से पूछा ;बेटा क्या बनोगे?: कौन सा प्रोफेशन अपनाओगे,किस राह पर जाओगे वह थोडा हिचकिचाया,फिर मुस्कराया और बोला मैं नेता बनूंगा मैं हुआ हैरान उसकी सोच पर परेशान नेता बनना होता है क्या इतना आसान? फिर पूछा :बेटा नेता जै
 
निर्मला कपिला