कविता--व्यंग महिला दिवस
दो दिन दिल्ली गयी थी इस लिये किसी ब्लाग पर नही आ सकी और न ही कुछ नया लिख सकी। फिर भी महिला दिवस हो तो सोचा कुछ तो लिखना ही चाहिये। इस लिये एक पुरानी कविता ठेळ रही हूँ। कल दिल्ली मे रंजू भाटिया जी और बेटे प्रकाश सिंह अर्श से मिली बहुत अच्छा लगा। मिलना तो
Mar 08 2010 10:02 AM



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