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तन पर लपेटे फटे व पुराने कपड़े---------------------(मिथिलेश दुबे)

तन पर लपेटे फटे व पुराने कपड़ेवह सांवली सी लड़की,कर रही थी कोशिश शायद ढक पाये तन को अपने,हर बार ही होती शिकार वहअसफलता और हीनता कासमजा की क्रूर व निर्दयी निगाहेंघूर रहीं थी उसके खुलें तन को,हाथ में लिए खुरपे सेचिलचिलाती धूप के तलेतोड़ रही थी वह पेड़ो से
 
Mithilesh dubey
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वो लड़की --------------------------------------------(मिथिलेश दुबे)

फटे पुराने कपड़े तन पर लिए,झाड़ियों में घूमती वो,हाथ में कुल्हाड़ीऔरसर पर लकड़ी का बोझ,नंगे पांव सर्द हवाओं के बीच,आंखों से टपकते आंसू उसकेकांटों के बीच टहलती वो,कटकटाते दांतों की आवाज,थरथराता उसका बदन,ठंड ने आगोश में ले लिया थासांवली सूरत को,हर रोज नजर
 
Mithilesh dubey