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हिंदी कविता की कार्यशाला

कोई ज़माना था कि कवि या लेखक कुछ लिखते थे तो सब से बड़ी समस्या होता था उसे छपवाना. जब किसी की पहली रचना छपती तो उसके लिए यह दिन सब से स्वर्णिम दिन की तरह होता. यह सब तो था समाचार पत्रों और पत्रिकायों के मामले में. अपनी पुस्तक का मामला तो किसी यज्ञ से कम
 
Rector Kathuria