ज़िंदगी का सच
क्यों खिले गुल ,इस चमन मेंदे के सुगंध ..फिर क्यों मुरझाए?शमा जली तो रोशनी के लिएपर परवाना क्योंसंग जल के मर जाए?गुनगुन करते भंवरे,क्यों सब पराग पी जाए?क्यों फूल भी हँस के अपनासब कुछ उस पर लुटाए ?झूमती गाती हवाक्यों एक दम शांत हो जाएधीमे धीमे बहते दिन
Mar 15 2010 12:05 PM



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