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तदेउष रोज़ेविच की कविताएं

संक्षिप्‍त परिचय 1921 में जन्मे पोलिश कवि , नाटककार और उपन्यासकार तदेउष रोज़ेविच बहुमुखी प्रतिभा के विश्व के सर्वाधिक महत्वपूर्ण साहित्यकारों में से एक हैं। रोज़ेविच कविता और नाटक के क्षेत्र में आवांगार्द के भी अग्रदूत माने जाते हैं। वे एक ऐसे नवपर्व
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तदेउष रोज़ेविच की कविताएं

यहां पर विश्‍वप्रसिद्ध कवि तदेउष रोजेविच का परिचय दूं , उससे पहले उनकी यह कविता पढ़ ली जाए. इससे बात जरा पूरी सी हो जाएगी. कवि यहां बुरे कवि का मजाक उड़ा रहा है, कि मृत्‍यु किसी बुरे कवि को महान कवि नहीं बना देगी. इस श्रृंखला की पांचवी कविता में भी क
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तदेउष रोज़ेविच की कविताएं

क्‍या किस्‍मत क्या किस्मत है, चुनूं रसभरियां जंगल में मैंने सोचा न है जंगल न रसभरियां क्या किस्मत है, जा सोऊं पेड़ की छांह तले मैंने सोचा पेड़ देते नहीं अब छाया क्या किस्मत है, मैं हूं संग तुम्हारे दिल धड़के मेरा मैंने सोचा आदमी के है नहीं दिल।
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तदेउष रोज़ेविच की कविताएं

रूपांतरण मेरा छोटा बेटा आता है कमरे में और कहता है ' तुम गि द्ध हो तो मैं चूहा ' मैं अपनी किताब फेंकता हूं परे डैने और पंजे उग आते हैं मुझमें उनकी अपशगुनी छाया दीवारों पर दौड़ती है मैं हूं गि द्ध वह है चूहा ' तुम हो भेड़िया मैं हूं बकरा ' मैंने मेज क
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तदेउष रोज़ेविच की कविताएं

बचा हुआ मैं चौबीस का हूं कसाईखाने में ले जाया गया मैं बच गया ये खोखले समानार्थी शब्द हैं इंसान और जानवर प्यार और नफरत दोस्त और दुश्मन अंधकार और प्रकाश एक सा तरीका है इंसानों और जानवरों को मारने का मैंने देखा है : कटे पिटे लोगों से लदे ट्रकों के ट्रक
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तदेउष रोज़ेविच की कविताएं

एक मुलाकात मैं उसे पहचान नहीं पाया जब मैं यहां आया हो सकता है यह भी हुआ हो इन फूलों को सजाने में इतनी देर लगी इस बेडौल गुलदान में ' मुझे इस तरह न देखो ' उसने कहा मैंने छेड़ा कटे बालों को अपने खुरदुरे हाथ से ' उन्होंने काट दिए मेरे बाल ' उसने कहा ' दे
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तदेउष रोज़ेविच की कविताएं

एक आवाज वे काट पीट डालते हैं वे यातना देते हैं एक दूसरे को चुप्पियों से लफ्जों से मानो कि एक और जीवन हो जीने को वे ऐसा करते हैं मानो कि वे भूल गए हों कि उनके शरीर मर जाएंगे एक दिन कि इंसान का अंतरमन जरा से में टूट जाता है एक दूसरे के लिए बेरहम वे कमज
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तदेउष रोज़ेविच की कविताएं

जिंदगी की मझधार में संसार के खात्मे के बाद अपनी मौत के बाद मैंने पाया खुद को जिंदगी की मझधार में मैंने रचा खुद को घड़ी जिंदगानी लोग मवेशी और धरती के नजारे यह मेज है मैं कह रहा था यह एक मेज है मेज पर रखी है ब्रेड और छुरी छुरी से ब्रेड काटी जाती है लोग
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तदेउष रोज़ेविच की कविताएं

हमें माफ करो भूल जाओ हमें हमारी पीढ़ी को भूल जाओ इंसानों की तरह जीओ बिसर जाओ हमें हमने डाह की पेड़ों और पत्थरों से हम जले कुत्तों से बल्कि बन जाऊं मैं चूहा तब मैंने कहा उसे मैं तो बल्कि रहूं ही न और मैं जाऊं सो और जागूं जब यु द्ध हो चुका हो वो बोली आ