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शंभु गुप्त की कविता:उदाहरण

अच्छे कवि के लिए आलोचकीय विवेक संपन्न होना जितना आवश्यक है कवि का आलोचक हो जाना स्वयं के कवि-कर्म के लिए उतना ही बाधक है.ऐसा हम हिंदी के उन चोटी के आलोचकों को देखते हुए कह सकते हैं जो अपने शुरुआती दौर में कवि भी रहे.पर धीरे-धीरे उनका कविता लिखना छूट
 
शशिभूषण
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मेरी ज़िद

गाँव से रीवा आए हम सुनते ही थे कि कोई आशीष त्रिपाठी हैं.बड़े मेधावी हैं.बी.एस.सी के बाद हिन्दी में एम.ए. करने गए.एम.ए.किया ही नहीं यू जी सी के जे.आर.एफ़ भी हुए.नाटकों में खाली पी.एच.डी नहीं कर रहे बड़े शौक और सफलता के साथ रंगमंच से भी जुड़े़ रहे हैं.कवि
 
शशिभूषण