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देता, उसको देत हूँ , सुनो सुदामा दास ! बिन दिए देऊं नहीं, चाहे फेरा फिरो पचास !!

एक आलेख दुखी मन से.............लोग कहते हैं इतिहास स्वयं को दोहराता है ।मैं कहता हूँ दोहराता क्या, तिहराता और चौहराता भी है ।हिन्दी ब्लोगिंग में इसका प्रमाण भी मिल रहा है ।पहले इतिहास में चलते हैं । भक्त सुदामा जब अपनी पत्नी कीप्रेरणा अथवा जिद्द के कारण
 
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