उदय प्रकाश के लिए
कवि की दुनिया दुनिया में कवि से ज्यादा उजड्ड कोई नहीं कवि से ज्यादा सभ्य कोई नहीं तमाम दुनिया पानी भरती है कवि के आगे इशारों पर नचाता फिरता है दिन रात दुनिया की ऐसी तैसी करता रहता है कवि दुनिया अपनी दुनिया में मगन हो दूसरी किसी दुनिया में निकल जाती क
Jul 17 2009 06:05 PM



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