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डा श्याम गुप्त की कविता--- कवि बन जाओ समय बांसुरी.....

कवि बन जाओ समय बांसुरीकवि बन जाओ समय बांसुरी ,एसे राग सुनाओ।देश राष्ट्र जन विश्व जगे, कवि-ऐसी तान सजाओ ।बनो प्रीति की प्रणय पांखुरीसौंधी गंध लुटाओ।बनो अभय की सुदृढ़ आंजुरीसत आचमन कराओ।तोड़ प्रथाओं की कारा , और-छोड़ तृषाओं को तुम।मोड़ समय की धाराओं को
 
Dr. shyam gupta
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हम कवि और हमारी कविताएं – रवि कुमार

हम कवि और हमारी कविताएं ( a poem by ravi kumar, rawatabhata ) हम सभी संवेदनशील हैं विचारशील भी हमारा सौन्दर्यबोध हर कुरूपता पर हमें द्रवित करता है हमारे पास शब्द हैं और कहने की बाजीगरी भी हम लिख लेते हैं कविता पर हमारी बदनसीबी हमारा समय क्रांतिकारी नहीं
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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सावधान निठल्ले कवियों........!

पति भी अब सम्पत्ति की तरह उपयोग में आने लगे हैं जैसे गहना, घर, फ़र्निचर, जमीन जायदाद या अन्य उपस्कर इत्यादि। जिन्हे आर्थिक संकट के समय बेच कर या गिरवी रख कर नगद पैसे ले सकते हैं। ज्यादा परेशानी है तो नीलाम भी कर सकते हैं। जब डॉक्टर, इंजिनियर, वकील या
 
ललित शर्मा
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अनंत कुशवाहा

अनंत कुशवाहा
 
प्रमोद रंजन
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उषा यादव

उषा यादव
 
प्रमोद रंजन
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सबसे प्राचीनतम ब्लॉगर । (व्यंग्य/कार्टून)

=> मित्रों, मैं हूं दुनिया का सबसे पुराना ब्लागर । मेरा नाम कपालभंजक है । मैं पाषाण काल का जीव हूं जो कि अफ्रीका के किसी कोने-अतरे में निवास करता है । मैं अपने कबीले का सेनापति हूं और साथ ही कबीले का सबसे श्रेष्ठ कवि भी । कबीले के सरदार ने कपालभंजक
 
K M Mishra
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Pash

From left to right-Waryam Sandhu, Amarjit Chandan, darshan Khatkar, Paash and Jaswant Khatkar. March 1974, Gandhi Ground Amritsarhttp://paash.wordpress.com/
 
प्रमोद रंजन
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