0
डा श्याम गुप्त की कविता--- कवि बन जाओ समय बांसुरी.....
कवि बन जाओ समय बांसुरीकवि बन जाओ समय बांसुरी ,एसे राग सुनाओ।देश राष्ट्र जन विश्व जगे, कवि-ऐसी तान सजाओ ।बनो प्रीति की प्रणय पांखुरीसौंधी गंध लुटाओ।बनो अभय की सुदृढ़ आंजुरीसत आचमन कराओ।तोड़ प्रथाओं की कारा , और-छोड़ तृषाओं को तुम।मोड़ समय की धाराओं को
May 29 2010 12:45 PM



Shuffle








