बस कर जी
रचना: बाबा बुल्ले शाह
स्वर: पूरण चन्द्र वडाली और प्यारेलाल वडाली (वडाली बन्धु)
बस कर जी हुण बस कर जी, इक बात असाँ नाल हँस कर जी
तुसीं दिल मेरे विच वसदे हो, एवें साथों दूर क्यों नसदे हो
नाले घत जादू दिल खसदे हो, हुण कित वल जासो नस कर जी
बस कर जी हुण ब
Dec 29 2009 11:41 AM



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