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ये दर्द बयां करती है !

ऐसा नहीं कि जो ये कलम चल रही है,हर दिशा में आग उगल रही है.नाहक  ही बन्दूक सीहर समय गरजा करती है.कभी इसके दर्द को समझो,ये सच हैकि ये लिखती यथार्थ हैमगर ये कोई न कोई दर्द बयां करती है.चाहे वे शब्द स्याही की जगहआंसुओं से सने होंशब्दों ने
 
रेखा श्रीवास्तव