कराटे और कराटे
यह किसी फिल्म का नाम भी हो सकता है लेकिन फिलहाल तो इस लेख का शीर्षक है। यह शीर्षक मैंने इसलिए रखा है क्योंकि एक समय था जब मैं बाबू मोशाय मिथुन चक्रवर्ती के कारण बिजली के खंबों, ईंट-गारे की पक्की दीवारों पर हूं-हां करते हुए कराटे का अभ्यास किया करता था।
Apr 20 2010 12:35 AM



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