पसंद करें
0
नापसंद करें

...मुसीबतों के सात दिन

मुआफ करें। पिछले दिनों मैं एक संस्मरणनुमा –मौत- के नाम से लिखना शुरू किया था। तीन किस्तें लिखने के बाद कुछ ख़ास वजह से उसे जारी नहीं रख पाया। आपने पुराना पढ़ा या नहीं, लेकिन इन सबको संक्षेप में लिखते हुए एक ही किस्त में पूरा कर रहा हूंः संजीवनाम चाहे कुछ
 
संजीव
पसंद करें
0
नापसंद करें

जिन्ना के बहाने जसवंत का जलजला

बीजेपी ने अपने पार्टी नेता जसवंत सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया। ये बहुत अप्रत्याशित नहीं है। लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी के भीतर सत्ता को लेकर जिस तरह की छटपटाहट देखी जा रही थी, ये उसी की परिणति है। पार्टी के बड़े नेता अपने ही दल के नेताओं के
 
संजीव
पसंद करें
0
नापसंद करें

शीला जी! ऐसा विकास आपको ही मुबारक़

दिल्ली की मुख्यमंत्री को मैं इसलिये जानता हूं क्योंकि वे रह-रहकर दिल्ली में नागरिक सुविधाओं में कमी के लिए बाहरी लोगों के बहाने पूर्वी यूपी और बिहार के मजदूरों, रिक्सा चालकों और ग़रीबों को जिम्मेदार मानती रही हैं। शीला दीक्षित को इसलिये जानता हूं क्योंकि
 
संजीव
पसंद करें
0
नापसंद करें

...तुम्हीं चल दिये दास्तां कहते- कहते

31 जुलाई 1981... आपके लिए थोड़ा अजीब होगा, लेकिन मुझे याद है। वो उमस भरी दोपहर... बिहार के छपरा शहर के विश्वेश्वर सेमिनरी हाईस्कूल के परिसर का सन्नाटा... मेरे नानाजी रिटायर हो रहे थे। उनका विदाई समारोह था। ये स्कूल उनके नाम पर नहीं था लेकिन संयोग था कि
 
संजीव
पसंद करें
1
नापसंद करें

मजबूत सरकार, बिखरा विपक्ष

लोकसभा चुनाव नतीजे निश्चित तौर पर अप्रत्याशित रहे। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जो दुर्गति हुई है वो सबके सामने है। चुनावी जीत के लिए बीजेपी ने तमाम आजमाए हुए हथकंडे अपनाए लेकिन विफल रहे। इस फेहरिस्त में वरुण गांधी प्रकरण से लेकर मोदी और खुद आडवाण
 
संजीव