पसंद करें
0
नापसंद करें

सहेजना रिश्तों का

पिछले दिनों मेरी ननद नीतू, और उनके पतिदेव शिशिर अमेरिका से लौटे। गत चार वर्षो से वेहोनोलुलू में थे। तमाम किस्से वहाँ की संस्कृति, लोग और अन्य मसलों पर खूब-खूब चर्चाएँ हुईं। चर्चा के दौरान ही शिशिर ने बताया कि वहां लोगों का सामान जब पुराना हो जाता है तब
 
वन्दना अवस्थी दुबे
टैग: कबाड़
पसंद करें
4
नापसंद करें

गजल

घर से जो निकल गया आदमी फिर मशीन में ढल गया आदमी इधर से धुआं उठा, उधर बरसा मेघ आँखों से बन गया आदमी फंस गया स्याह रंग बदन में उसके पत्थर ले खुद से पिल गया आदमी मशीन उसके शहर में भी बंद पड़ी है जानता है कल-पुर्जे नया आदमी पेचकस, प्लास, बटन, कुछ खराब दि
 
प्रीतीश बारहठ
टैग: कबाड़