विद्यापति गीत
कवि कोकिल विद्यापतिकनक-भूधर-शिखर-बासिनीचंद्रिका-चय-चारु-हासिनिदशन-कोटि-विकास-बंकिम-तुलित-चंद्रकले ।।क्रुद्ध-सुररिपु-बलनिपातिनिमहिष- शुम्भ-निशुम्भघातिनिभीत-भक्त-भयापनोदन -पाटव -प्रबले।।जे देवि दुर्गे दुरिततारिणिदुर्गामारी - विमर्द -कारिणि भक्ति - नम्र -
Aug 13 2009 11:33 AM



Shuffle








