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विद्यापति गीत

कवि कोकिल विद्यापतिकनक-भूधर-शिखर-बासिनीचंद्रिका-चय-चारु-हासिनिदशन-कोटि-विकास-बंकिम-तुलित-चंद्रकले ।।क्रुद्ध-सुररिपु-बलनिपातिनिमहिष- शुम्भ-निशुम्भघातिनिभीत-भक्त-भयापनोदन -पाटव -प्रबले।।जे देवि दुर्गे दुरिततारिणिदुर्गामारी - विमर्द -कारिणि भक्ति - नम्र -
 
Kusum Thakur