विष्णु नागर की एक कविता
मेरा जीवननाक की दिशा में दौड़ाता हैकान, आँखसिर, मुँहकुछ नहींनाक की दिशा में दौड़हाथ, पाँवपेट, पीठकुछ नहींनाक की दिशा में दौड़पीठ की दिशा में अन्धकार हैपेट की दिशा में दौड़मेरा जीवन कहता हैनाक की दिशा में दौड़मेरा जीवन कहता हैक्या करता है?नाक की दिशा में
Jan 14 2010 06:34 PM



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