हिंदी समाज की उपलब्धि बनीं प्रियंका और कंगना ???
माफ करें। फेसबुक पर कल यह राय रखी थी। दोस्तों ने इस पर टिप्पणियां दीं और अपनी साच जाहिर की। मुझे लगता है कि प्रियंका खेपड़ा और कंगना रानाऊत को मिले राष्ट्रीय पुरस्कार को हिंदी समाज की उपलब्धि के तौर पर देखा जाना चाहिए। लिखने और बताने की जरूरत नहीं कि
Jan 25 2010 08:23 AM



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