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लड़कियों, औरतों को सामान कहूं तो मां को क्या कहूं
कुछ और झूठ मेरे चेहरे पर लगा दोकुछ और मेरा चेहरा सजा दो,कहीं बचा हो अगर सीने में दर्द किसी का, उसे भी हटा दोतैयार हो रहा हूं मैं अब दुनिया से मिलने के लिये।बहुत मुश्किल है भूलना सच कोई याद है तो उसे भी जेहन से मिटा दो।सीखा है जो मैंने अबएक बार फिर उसे
Jun 04 2010 09:43 PM



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