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खेल और व्यापार : अशोक सेक्सरिया

प्राय: सभी देशों में सरकार , उद्योग , जनसंचार के माध्यम ( मीडिया ) और सेना ने प्रतियोगात्मक खेलों के प्रति जनमानस में जबरदस्त आकर्षण पैदा करने की कोशिश की है । अगर हम एशियाई खेलों के आयोजन के सिलसिले में इन चारों की भूमिका के बारे में सोचने की कोशिश करें
 
अफ़लातून
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क्या एशियाई खेल वास्तव में खेल हैं ? – अशोक सेक्सरिया

एशियाई खेलों को लेकर देश भर में जब भयंकर उन्माद फैलाया जा रहा है, तब यह प्रश्न उठाना कि यह खेल वास्तव में खेल हैं भी कि नहीं – मूर्खता लगता है । मूर्खता के डर से आदमी सोचना बंद कर देता है और उस पागलपन में शामिल हो जाता है जो सरकार , कम्पनियां [...]
 
अफ़लातून