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Ajnabi

डायबिटीज, ह्रदय रोग, पक्षाघात, एडसनहीं यही बीमारियां नहीं होतींवो क्या है जो हमें मजबूर करता हैजिन्दगी भरउन खुराफातों के लिएजो कभी तो हम चाहते हैंकभी नहीं चाहते हुए भीसम्पन्न करते हैंजैसे नौकरी, जैसे ब्‍लागि‍न्‍गगहरी नींद हैगहरा आलस हैऔर ‘मैं’ जकड़ा ही
 
Rajey Sha
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असल मुददा

जमाने का अजब ढब हो गया है,मुददे उठाना ही मुददा हो गया हैकि‍से खबर असल मुददा क्‍या है?असल मुददा तो कहीं खो गया हैराजेशा का ब्लॉग - अजनबी
 
Rajey Sha
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आदमी कैसे कैसे जीना सीख गया है

पाना-खोना झूठा, छोड़ के जानी दुनियांफिर भी कितने ख्वाब संजोना सीख गया हैआदमी कैसे कैसे जीना सीख गया हैधो धोकर पीता है चरणरज मक्कारों कीजहर भी, और बहुत कुछ पीना सीख गया हैआदमी कैसे कैसे जीना सीख गया हैचौराहों पर मौतों से कोई फर्क नहीं हैआदमी, कितने आतंकों
 
Rajey Sha
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पाकि‍स्‍तान में महि‍लाओं के बुरे हाल,

ये अलग बात है कि‍ हम भारत में हुए ऐसी दुर्घटनाओं अपराधों की तस्‍वीरें नहीं प्राप्‍त कर सके । This is really horrible. Faces of these women were mutilated by acid, and this is the work of bastards who call themselves men. This is such a strange way of
 
Rajey Sha
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फिर तेरे इशारे___

जीना मुश्किल, और चुप्पा दिलवक्त का वार है, कैसे सहें?रोते गीत हैं, जहरीले मीत हैंछंदों में इन्हें, कैसे कहें?जिन्दा तो लानत, मरे तो अमानतइस प्रेम के नद में कैसे बहें?दोपहर चढ़ी और रात भी बढ़ीचि‍न्‍ताओं के पर्वत कैसे ढहें?नैनों के काम, रहे सदा बदनामफिर तेरे
 
Rajey Sha
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सस्‍नेह आमंत्रण

क्‍या आपने हमारी कवि‍ता "नाराजगी का वृक्ष" पढ़ी ??अगर नहीं तो ये लि‍न्‍क देखें- राजेशा का ब्लॉग - अजनबी
 
Rajey Sha
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26 नवम्‍बर की कोशि‍श

हमने देखे सच के इशारे अजनबी अपनी ही आंखों के नजारे अजनबी अपनों की गुजारिशें और राम का भाग्य सोने के हिरन थे सारे अजनबी मुश्किल हालात, नहीं बस में बात शहर अपना है लोग सारे अजनबी अजनबीयत का रिश्ता अजीब देखा तुम हमारे अजनबी, हम तुम्हारे अजनबी अमावस रातो
 
Rajey Sha
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श्रम के मोती काफी

पेट भरे नींद आ आये, इतनी रोटी काफी मेहनत करूं और चढ़े देह पर, उतनी बोटी काफी लानत है इस फैशन पर, रूह नंगी कर देता है जिसमें मेरे पैर समाएं, इतनी धोती काफी चाँद, तारे, सूरज की किरने, रोशनी कुछ ज्यादा है कदम-कदम जो राह दिखाये, दीप की ज्योति काफी बेईमानी
 
Rajey Sha
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आप न पढ़े तो भी ये काफी बेहतर किस्सा है

एक पिता अपनी किशोर बेटी के बेडरूम के पास से गुजरा और देखकर हैरान हुआ कि बिस्तर बड़ा साफ सुथरा और सलीके से लगा हुआ है। फिर उसने देखा कि तकिये पर एक खत रखा है, आगे बढ़कर देखा तो वह ‘‘पिता’’ को ही सम्बोधित करते हुए लिखा था। किसी अनहोनी की आशंका में पिता न
 
Rajey Sha
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