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कथा मोर,मणि और वनदेवी की

अरण्यरोदन नहीं है यह चीत्कार(एक)इस जंगल में एक मोर थाआसमान से बादलों का संदेशा भी आ जातातो ऐसे झूम के नाचताकि धरती के पेट में बल पड़ जातेअंखुआने लगते खेतपेड़ों की कोख से फूटने लगते बौरऔर नदियों के सीने में ऐसे उठती हिलोरकि दूसरे घाट पर जानवरों को
 
अशोक कुमार पाण्डेय