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इस लेख को जो भी आप नाम देना चाहे दे.....

यह लेख कोई कहानी नही, एक सच्ची बात है जो मेरे संग बीती, लेकिन मेरे पास इसे कोई नाम नही जो दे सकूं...यह कहानी आज से नही करीब २५,२६ साल पहले शुरु होती है, उस समय मेरी शादी नही हुयी थी, ओर मेरे पास एक कमरा था साथ मै एक किचन ओर बाथरुम  था, मेरे लिये
 
राज भाटिय़ा
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अनार कली कहां चली.....

भाई ना तो हम कवि है, ओर ना ही शायर, लेकिन इन सात दिनो मै इतने शेर पढे, ओर इतनी बाते पढी की मजा आ गया...जब हम रोहतक जा रहे थे तो जेसे जेसे ट्रको पर, ट्रालियो पर स्कुटरो पर ओर रिक्क्षा पर नजर पडती तो कुछ ना कुछ पढने को मिल जाता ओर सफ़र भी जल्द ही खत्म भी हो
 
राज भाटिय़ा
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जब हम ने सच मै भुत को देखा??

बात बहुत पुरानी है, शायद ४० साल या इस से भी ज्यादा, तब हमारा मकान बन रहा था,नयी आवादी थी, ओर सभी मकान बहुत दुर दुर थे, ओर पिता जी ने सब से पहले एक कमरा बनवाया साथ मै एक स्टोर रुम जहां पर सीमेंट ओर बाकी समान रखा जाता था, मेरी उम्र शायद १३ या १४ बर्ष की
 
राज भाटिय़ा
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पुराने साल की रात ओर नये साल की सुबह

चलिये नया साल भी आ पहुचा, ओर इस की सुबह हम लोगो ने बिना सोये ही देखी, यानि सारी रात हम मियां बीबी घर पर ही रहे, रात को आठ बजे बच्चो ने अपने निर्धारित प्रोगराम के अनुसार दोस्तो के संग एक दोस्त के घर नया साल मनाना था, ओर पहली बार बच्चे कार अकेले ले कर गये,
 
राज भाटिय़ा
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भाटिया जी कही आप की भी तेहरवीं ना मनानी पडे??

आज हमारे यहां किसी की तेरहवीं थी, सभी जानपहचान वाले आये हुये थे, खुदी हवन किया,किया कुछ भजन किया सब ने मिल कर, ओर फ़िर थोडा बहुत खान खाया, फ़िर सब इधर उधर की बाते करते रहे, ओर उन सज्ज्न के बारे भी जिन की मुत्यू हुयी है. फ़िर सब धीरे धीरे वहां से वापिस आ
 
राज भाटिय़ा
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पंगे ही पंगे जो हम लेते है.......

एक छोटी सी पोस्ट.... हम सब ने अपने अपने ब्लांग पर बहुत सारे विजेट लगा रखे है, मेने भी जिन का कोई भी लाभ नही... बल्कि हम इन विजेट से खुद भी ओर दुसरो को भी कठिनाई मै डालते है, यानि बस ब्लांग को सुंदर बनाने के लिये हम खुब दिल खोल कर पंगे लेते है, ओर नुक
 
राज भाटिय़ा