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ग्लोबल वार्मिंग

पत्ते सूखे जाते हैं बादल ना अब गरजाते हैं बेटी की शादी, मुन्ने की पढाई घर का खर्चा, गेहूं की पिसाई पेट्रोल की क़ीमत, छत पे दीमकजेबें खाली, हर चीज़ की किल्लत परेशान सब नज़र आते हैं इतने पर भी हंसते गाते बिज़लरी की बोतल लिए हाथ मेंबडी बडी गाडी से उतरकर
 
रवीन्द्र गोयल्
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हीरे की मण्डी में हारती जिन्दगी

शिरीष खरे, सूरत से लौटकर मंदी की उठा-पटक के बीच सूरत का चेहरा भले कई लोगों के लिए अब भी चमकदार लग रहा हो लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसा अंधेरा फैलता जा रहा है, जिसमें जिंदगी हारती जा रही है. मंदी के तूफान ने हीरे की मण्डी सूरत की सूरत कुछ ऐसी बिगाड़ी कि
 
CRY के दोस्त
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इसलिए सूरत में 50,000 बच्चे काम पर जाते है

शिरीष खरेसूरत: शहर में जो 262 प्राइमरी स्कूल हैं, उनमें महापालिका के स्कूलों की संख्या दो है। दूसरे हैरतअंगेज आंकड़ें के मुताबिक, महापालिका के सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या है चार। 112.27 वर्ग किलोमीटर में फैले सूरत की 29 लाख आबादी में से 6 लाख गरीब हैं। एक
 
CRY के दोस्त